भिवंडी पूर्व में 12 हजार मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप, SIR रद्द करने की रईस शेख की मांग |

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मतदाता सूची में 540 नामों पर आपत्ति का दावा; BLO के कामकाज की जांच और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग

मुंबई/भिवंडी | रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत

मुंबई। भिवंडी पूर्व विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान करीब 12 हजार मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश किए जाने का आरोप समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने लगाया है। उन्होंने चुनाव आयोग से SIR प्रक्रिया रद्द करने, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने और बूथस्तरीय अधिकारियों (BLO) के कामकाज की पड़ताल कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

गुरुवार को मुंबई मराठी पत्रकार संघ में आयोजित पत्रकार परिषद में रईस शेख ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बाद भिवंडी पूर्व की मतदाता सूची में केवल 1.91 लाख मतदाताओं के नाम रह गए हैं। उन्होंने कहा कि कई नागरिकों द्वारा एन्युमरेशन फॉर्म जमा करने के बावजूद उनके नाम सूची में नहीं दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया भाजपा के पक्ष में होती दिखाई दे रही है। हालांकि, इन आरोपों और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पत्रकार परिषद में भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका के उपमहापौर तारिक मोमीन, स्थायी समिति अध्यक्ष ईशा इमरान खान, प्रभाग समिति अध्यक्ष हसनैन फारुकी, तबस्सुम मिर्जा, समीना अंसारी, नगरसेवक प्रशांत लाड और रोहिदास वाघमारे सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

2019 में 2.69 लाख मतदाता होने का दावा

रईस शेख के अनुसार, वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के समय भिवंडी पूर्व में करीब 2.69 लाख मतदाता थे। बाद में यह संख्या बढ़कर लगभग 3.76 लाख हो गई। हालांकि, उनके दावे के मुताबिक, वर्तमान SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में केवल 1.91 लाख नाम रह गए हैं। उन्होंने इन आंकड़ों के बीच अंतर की विस्तृत जांच कराने की मांग की।

शेख ने कहा कि भिवंडी के झोपड़पट्टी और औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मजदूर, गरीब और रोजाना काम करके आजीविका चलाने वाले परिवार रहते हैं। ऐसे नागरिकों के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाना कठिन हो सकता है। उन्होंने मांग की कि पात्र मतदाताओं के नाम उचित जांच के बिना सूची से नहीं हटाए जाएं।

फॉर्म-7 के जरिए 540 नामों पर आपत्ति का दावा

विधायक ने दावा किया कि 11 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची के 540 नामों पर फॉर्म-7 के माध्यम से आपत्तियां दर्ज की गई थीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इनमें से करीब 500 आपत्तियां मुस्लिम मतदाताओं के नामों के खिलाफ थीं। उनके अनुसार, कुछ मामलों में भाजपा के बूथस्तरीय एजेंटों ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

शेख ने पत्रकार परिषद में संबंधित मतदाताओं के दस्तावेजों और एन्युमरेशन फॉर्म की प्रतियां प्रस्तुत करने की बात कही। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया से वास्तविक निवासियों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

डुप्लीकेट नामों की जांच की मांग

रईस शेख ने मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों का मुद्दा भी उठाया। उनके मुताबिक, कोरोना काल के दौरान करीब 22 हजार डुप्लीकेट नाम हटाए गए थे, जबकि वर्तमान सूची में अभी भी दो से तीन हजार दोहरी प्रविष्टियां होने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि दोहरी प्रविष्टियों को हटाना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम नहीं हटाए जाने चाहिए। उन्होंने प्रत्येक मामले की उचित जांच करने और यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया हो, तो नियमानुसार उसे दोबारा शामिल करने की मांग की।

BLO के कामकाज और बूथ एजेंटों के नियमों पर सवाल

विधायक ने शिकायत की कि कई मतदाताओं के फॉर्म जमा होने के बावजूद उनके नाम सूची में दिखाई नहीं दे रहे हैं। कुछ फॉर्म गायब होने की शिकायतें भी सामने आने का उन्होंने दावा किया। उन्होंने संबंधित BLO के कामकाज की जांच कराने और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

उन्होंने बूथस्तरीय एजेंटों द्वारा मतदाता सूची पर आपत्ति दर्ज कराने से संबंधित नियमों में बदलाव पर भी सवाल उठाए। शेख के आरोप के मुताबिक, नियमों में बदलाव के कारण विधानसभा क्षेत्र के अन्य हिस्सों से जुड़े एजेंटों को भी आपत्तियां दर्ज कराने की अनुमति मिल सकती है। उन्होंने इन बदलावों की समीक्षा करने और SIR प्रक्रिया की दोबारा जांच कराने की मांग की।

अल्पसंख्यक, दलित और आदिवासी मतदाताओं पर असर की आशंका

रईस शेख ने आशंका जताई कि SIR प्रक्रिया से अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया रद्द करने, प्राप्त शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने और मतदाताओं के दस्तावेजों का दोबारा सत्यापन करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। यदि जांच में किसी व्यक्ति या संस्था की अनियमित भूमिका सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने भिवंडी तक सीमित न रहते हुए पूरे महाराष्ट्र में ऐसी शिकायतों की जांच कराने की भी मांग की।

अभिनेता इमरान खान के मुद्दे पर भी टिप्पणी

पत्रकार परिषद के दौरान अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने के लिए कहे जाने के मुद्दे पर भी रईस शेख ने टिप्पणी की। उन्होंने इस प्रकार की भूमिका की आलोचना करते हुए नागरिकों के अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा किए जाने की बात कही।

भिवंडी के विकास का मुद्दा भी उठा

पत्रकार परिषद में भिवंडी के स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों पर भी चर्चा हुई। स्थायी समिति की अध्यक्ष ईशा इमरान खान ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से महानगरपालिका में निर्वाचित नेतृत्व नहीं होने के कारण प्रशासनिक जवाबदेही और विकास कार्यों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधियों के आने से शहर के विकास को गति मिलेगी।

पत्रकार परिषद में मुख्य रूप से भिवंडी पूर्व की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं, 540 नामों पर आपत्तियों, करीब 12 हजार मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका और SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए। रईस शेख ने पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार सुरक्षित रखने के लिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधारों की मांग की।

रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत

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