वन अधिकार, घरों के रिकॉर्ड, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के मुद्दे उठेंगे; पांच जिलों में तैयारियां शुरू
पालघर, मनोर | रिपोर्टर: तृप्ति प्रमाण
वन अधिकारों के लंबित दावों, घरों के रिकॉर्ड, रोजगार की कमी और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए श्रमजीवी संगठन ने आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन के अनुसार, 27 अक्टूबर 2026 को एक लाख से अधिक आदिवासी मुंबई की ओर कूच करेंगे। ‘संविधान हक्क संघर्ष मोर्चा’ की शुरुआत भिवंडी के पास दिवे से होगी।
वन अधिकार और घरों के रिकॉर्ड की मांग
श्रमजीवी संगठन की प्रमुख मांग है कि वन अधिकारों के लंबित दावों का जल्द निपटारा किया जाए और पात्र आदिवासी परिवारों को वनपट्टे दिए जाएं। इसके साथ ही घरों का रिकॉर्ड तैयार करने और गांवठाण का विस्तार करने की मांग भी उठाई जाएगी।
संगठन आदिवासी क्षेत्रों में पीने के पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराने की मांग भी सरकार के सामने रखेगा।
रोजगार और मजदूरी के मुद्दे भी उठेंगे
मोर्चे में आदिवासी समुदाय के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, रोजगार गारंटी योजना के तहत काम उपलब्ध कराने और मजदूरी का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग शामिल है।
इसके अलावा, ठेका श्रमिकों के वेतन से संबंधित समस्याओं का समाधान करने की मांग भी उठाई जाएगी।
पांच जिलों में मोर्चे की तैयारियां
श्रमजीवी संगठन के संस्थापक विवेक पंडित, संस्थापिका विद्युल्लता पंडित और अध्यक्ष सीता घाटाळ के मार्गदर्शन में पांच जिलों में मोर्चे की तैयारियां शुरू की गई हैं।
संगठन का कहना है कि आदिवासी समुदाय के मूलभूत और संवैधानिक अधिकारों के लिए यह मोर्चा निकाला जा रहा है। संगठन चाहता है कि सरकार वर्षों से लंबित समस्याओं पर ठोस निर्णय ले।
सरकार के रुख पर रहेगी नजर
श्रमजीवी संगठन ने 27 अक्टूबर को मंत्रालय की ओर निकाले जाने वाले संविधान हक्क संघर्ष मोर्चे में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान के लिए क्या कदम उठाती है।




