जौनपुर मेडिकल कॉलेज में 30 वर्षीय मरीज की जटिल सर्जरी सफल, हाइपोस्पेडियस विद कॉर्डी का हुआ ऑपरेशन |

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यूरोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने किया ऑपरेशन; प्रधानाचार्य और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने चिकित्सकों को दी बधाई

जौनपुर | संवाददाता: शम्भू विश्वकर्मा

उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर में 30 वर्षीय मरीज की जन्मजात बीमारी हाइपोस्पेडियस विद कॉर्डी (Hypospadias with Chordee) की सफल सर्जरी की गई। मरीज जौनपुर जिले के मछलीशहर का निवासी है। यह जटिल शल्य चिकित्सा यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सक डॉ. हिमांशु सिंह ने विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम के सहयोग से संपन्न की।

ऑपरेशन में डॉ. अभिषेक मिश्रा, डॉ. इमरान, डॉ. नाजिया, डॉ. हर्षित शर्मा और डॉ. राजन्य प्रजापति ने सहयोग प्रदान किया। ऑपरेशन के बाद मरीज चिकित्सकों की निगरानी में है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

क्या है हाइपोस्पेडियस विद कॉर्डी?

हाइपोस्पेडियस एक जन्मजात स्थिति है, जिसमें पुरुष जननांग के अग्रभाग पर स्थित मूत्रमार्ग का छिद्र सामान्य स्थान पर न होकर नीचे की ओर खुलता है। इसके साथ कॉर्डी होने पर लिंग में नीचे की ओर असामान्य झुकाव भी हो सकता है। यह स्थिति आमतौर पर जन्म से मौजूद रहती है।

कुछ मरीजों को इस कारण पेशाब करने में परेशानी, मूत्रधारा की दिशा में बदलाव या लिंग के झुकाव से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

इस बीमारी का उपचार मरीज की स्थिति, मूत्रमार्ग के छिद्र की जगह और लिंग के झुकाव की गंभीरता के आधार पर तय किया जाता है। आवश्यकतानुसार सर्जरी के माध्यम से मूत्रमार्ग के छिद्र को उचित स्थान पर लाने और असामान्य झुकाव को ठीक करने का प्रयास किया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर मरीज की स्थिति के अनुरूप उपचार की योजना बनाई जा सकती है।

प्रधानाचार्य ने चिकित्सकीय टीम को दी बधाई

चिकित्सा महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) आर.बी. कमल ने सफल ऑपरेशन के लिए चिकित्सकीय टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हाइपोस्पेडियस विद कॉर्डी जैसी जन्मजात और जटिल स्थिति में विशेषज्ञ शल्य चिकित्सा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय का निरंतर प्रयास है कि मरीजों को संस्थान में ही गुणवत्तापूर्ण और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए अन्य बड़े शहरों में न जाना पड़े।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने टीम के समन्वय की सराहना की

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) ए.ए. जाफरी ने कहा कि यूरोलॉजी विभाग की चिकित्सकीय टीम ने आपसी समन्वय और कुशलता के साथ इस शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक संपन्न किया। उन्होंने बताया कि चिकित्सा महाविद्यालय में उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं के माध्यम से मरीजों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप उपचार प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सफल ऑपरेशन मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।

एनेस्थीसिया टीम और सहायक कर्मचारियों का योगदान

इस जटिल ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया प्रदान करने में डॉ. अरविंद पटेल, डॉ. जीसान जफर और डॉ. अनिल गौण ने योगदान दिया। इसके अलावा सहायक कर्मचारी अनुज, राजूमजूमदार, इन्दु, आस्था, रीना, काजल, सुनील, प्रेम, अभिषेक, जुबेर और विशाल का भी विशेष सहयोग रहा।

ऑपरेशन के बाद मरीज चिकित्सकों की निगरानी में है। उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

संवाददाता: शम्भू विश्वकर्मा

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