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मत्स्यपालन और जेनेटिकली इम्प्रूव्ड फिश सीड: एक आजीविका का सशक्त साधन |

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पालघर, 16 सितंबर — केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान और आदिवासी एकता मित्र मंडल के संयुक्त आयोजन में मंगलवार को मनोर स्थित बिरसायत भवन में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसका विषय था — “मत्स्यपालन और आनुवंशिक रूप से सुधारित मछली के बीज: एक आजीविका का साधन”

इस कार्यशाला में पालघर जिले के सैकड़ों किसानों ने भाग लिया, जिन्हें ताज़े पानी में मत्स्यपालन की व्यावहारिक और वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, 50 चयनित किसानों को विशेषज्ञों के हाथों उन्नत जेनेटिक फिश सीड (मत्स्यबीज) वितरित किए गए, जिससे उनकी आय बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।

मुख्य अतिथियों ने किया सम्मानित समापन
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध उद्यमी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुंबई महानगर के संघचालक श्री सुरेश भगेरिया ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे — मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान के निदेशक डॉ. मुकुंद गोस्वामी, डॉ. किरण रसाळ, मत्स्य विभाग के सेवानिवृत्त उपायुक्त श्री वायेडा साहब, श्री राजकुमार सिंगला, श्री लेलीन सिंग, आदिवासी एकता मित्र मंडल के संस्थापक अध्यक्ष श्री संतोष जनाठे, उपाध्यक्ष श्री दामोदर कासट, श्री मंगेश गोंड और श्री सुनील किरकिरा।

युवा टीम और महिला किसानों की बढ़-चढ़कर भागीदारी
कार्यक्रम में स्थानीय युवा स्वयंसेवकों की टीम ने संचालन और व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से, किसान महिलाओं की बड़ी संख्या ने भी इस कार्यशाला में सक्रिय भाग लिया, जो महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में एक सकारात्मक संकेत है।

लक्ष्य: आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा और आत्मनिर्भरता
आयोजकों ने बताया कि यह पहल आदिवासी बहुल क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका, रोजगार सृजन और पोषण सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्नत मछली प्रजातियों के उपयोग से किसानों को अधिक उत्पादन, कम समय और अधिक लाभ की संभावना है।

इस कार्यशाला के माध्यम से सरकारी संस्थानों और स्थानीय संगठनों के बीच सहयोग का एक नया मॉडल भी स्थापित हुआ है, जो भविष्य में अन्य जिलों में भी दोहराया जा सकता है।

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Rajesh