वसई–विरार शहर महानगरपालिका (बीवीसीएमसी) में महापौर और उपमहापौर पद के चुनाव संपन्न होने के बाद अब नगरसेवकों की नियुक्तियों और विभिन्न महत्वपूर्ण समितियों के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। महानगरपालिका की प्रमुख समितियों में सभापति पद और स्वीकृत (नामित) नगरसेवकों की नियुक्ति को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की निगाहें टिकी हुई हैं। महापौर पद पर बहुजन विकास आघाड़ी के अजीत पाटिल के चयन के बाद उपमहापौर पद पर भी इसी गठबंधन का दबदबा देखने को मिला है। इसके चलते अब महानगरपालिका की स्थायी समिति, महिला एवं बाल विकास समिति, स्वास्थ्य समिति और वृक्ष प्राधिकरण समिति जैसी महत्वपूर्ण समितियों में किन नगरसेवकों को जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार बहुजन विकास आघाड़ी अपने भरोसेमंद और अनुभवी नगरसेवकों को प्रमुख पदों पर मौका देने की रणनीति बना रही है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी महत्वपूर्ण पदों पर मजबूत और अनुभवी चेहरों को आगे लाने की तैयारी में जुटी हुई है, जिससे आने वाले समय में राजनीतिक मुकाबला और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। इसी के साथ दस स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति को लेकर भी उत्सुकता बनी हुई है। यह चर्चा जोरों पर है कि विभिन्न दलों को कितने स्वीकृत नगरसेवक मिलेंगे और उनकी नियुक्ति लॉटरी प्रणाली से होगी या फिर दलों की सिफारिश के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। महानगरपालिका के कार्यों में स्वीकृत नगरसेवकों की भूमिका प्रभावशाली मानी जाती है, इसलिए इस प्रक्रिया को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके अलावा विपक्ष के नेता पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। संभावना जताई जा रही है कि भाजपा किसी अनुभवी और संगठनात्मक रूप से मजबूत नगरसेवक को विपक्ष का नेता बना सकती है, जिससे महानगरपालिका में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है। जानकारी के अनुसार स्वीकृत नगरसेवकों की नियुक्ति, समितियों के सभापति पदों का चयन और विपक्ष के नेता के चयन की प्रक्रिया 20 फरवरी तक पूरी होने की संभावना है। इन सभी राजनीतिक घटनाक्रमों के चलते वसई–विरार महानगरपालिका का माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
वसई–विरार | संवाददाता :साहिल यादव