पालघर से विशेष रिपोर्ट
महाराष्ट्र के पालघर जिले में इन दिनों एसी, फ्रिज, कूलर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान की खरीद को लेकर ग्राहकों की शिकायतें तेजी से सामने आ रही हैं। ग्राहकों का आरोप है कि कई डीलर और दुकानदार सामान बेचते समय 5 साल की वारंटी का दावा करते हैं, लेकिन जब सामान खराब हो जाता है तो उन्हें सिर्फ 1 साल की वारंटी बताकर टाल दिया जाता है। ग्राहकों के अनुसार गर्मी के मौसम की शुरुआत के साथ ही लोग बड़ी कंपनियों के एसी, फ्रिज और कूलर खरीद रहे हैं। इनकी कीमत लगभग 40 हजार से 50 हजार रुपये तक होती है। सामान खरीदते समय डीलर ग्राहकों को बताते हैं कि उत्पाद पर 5 साल की वारंटी है, जिससे ग्राहक भरोसा करके सामान खरीद लेते हैं। लेकिन कई मामलों में देखा गया है कि 12 से 14 महीने के भीतर ही एसी, कूलर या फ्रिज में खराबी आ जाती है। जब ग्राहक शिकायत लेकर दुकान या डीलर के पास जाते हैं, तो उन्हें यह कहकर भेज दिया जाता है कि उत्पाद की केवल 1 साल की ही वारंटी थी। इसके बाद ग्राहकों को कंपनी के सर्विस सेंटर से संपर्क करने के लिए कहा जाता है। ग्राहकों का कहना है कि सर्विस सेंटर से तकनीशियन आने के बाद पार्ट बदलने या मरम्मत के नाम पर उनसे 4 से 5 हजार रुपये तक की मांग की जाती है। ऐसे में ग्राहक सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्हें 5 साल की वारंटी बताकर सामान बेचा गया था, तो फिर इतनी जल्दी खराब होने पर अतिरिक्त पैसे क्यों देने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि दुकानदार सामान बेचते समय यह स्पष्ट नहीं बताते कि 5 साल की वारंटी में कौन-कौन से पार्ट शामिल हैं और किस पर कितने समय तक वारंटी लागू होती है। कई बार बिल पर भी यह जानकारी लिखी नहीं होती। डीलरों का कहना है कि हर इलेक्ट्रॉनिक सामान के साथ एक वारंटी बुक या मैनुअल दिया जाता है, जिसमें पूरी जानकारी होती है। लेकिन ग्राहकों का कहना है कि यह बुक अक्सर अंग्रेजी में होती है, जिसके कारण अधिकांश लोग उसे समझ नहीं पाते और दुकानदार की बातों पर भरोसा करके सामान खरीद लेते हैं। पालघर के उपभोक्ताओं की मांग है कि जब भी कोई वारंटी वाला सामान बेचा जाए, तो बिल पर साफ-साफ हिंदी या स्थानीय भाषा में यह लिखकर दिया जाए कि किस-किस पार्ट पर कितने समय की वारंटी है। इससे भविष्य में ग्राहकों और डीलरों के बीच होने वाले विवाद से बचा जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वारंटी की शर्तें स्पष्ट रूप से बताई जाएं, तो उपभोक्ताओं को धोखे से बचाया जा सकता है और बाजार में पारदर्शिता भी बनी रहेगी।