तृप्ति प्रमाण | मुंबई
महाराष्ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने अपने वरिष्ठ नेताओं को मनाने की कवायद में एक बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने इस बार राज्यसभा के लिए सीटों के चयन में कई दावेदारों की उम्मीदों को दरकिनार करते हुए, अपने असंतुष्ट वरिष्ठ नेताओं को साधने की रणनीति अपनाई है।
पीछे के दरवाज़े से राज्यसभा में एंट्री
एनसीपी ने पिछले कुछ समय से नाराज़ चल रहे वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को रिझाने के लिए उनके खास माने जाने वाले राजेंद्र जैन को राज्यसभा भेजने का फैसला किया है। आज महायुति की ओर से राजेंद्र जैन ने एनसीपी, शिवसेना और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस अवसर पर प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल के अलावा शिवसेना से भरत गोगावले और भाजपा की ओर से आशिष शेलार तथा पार्थ पवार जैसे दिग्गज नेता उपस्थित थे।
आंतरिक मतभेदों को दूर करने की कोशिश
गौरतलब है कि अजित पवार के निधन के बाद जब से पार्टी की कमान पवार परिवार के हाथों में आई है, तब से कई वरिष्ठ नेताओं को हाशिए पर रखे जाने की अटकलें लगती रही हैं। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे दिग्गजों की उपेक्षा को लेकर संगठन में अंदरूनी तनाव की खबरें आ रही थीं। हालांकि, अब पार्टी नेतृत्व ने इस नाराज़गी को दूर करने की कवायद शुरू कर दी है।
विदर्भ को मिला प्रतिनिधित्व
विधान परिषद की सीट पर सुनील तटकरे के पुत्र अजित तटकरे को जगह देकर एक गुट को खुश किया गया था, वहीं अब राजेंद्र जैन के माध्यम से प्रफुल्ल पटेल की भी घर वापसी करवाई गई है। राजेंद्र जैन विदर्भ क्षेत्र के कद्दावर नेता हैं और विधान परिषद में दो बार सदस्य रह चुके हैं। उन्हें राज्यसभा भेजने का मुख्य उद्देश्य विदर्भ के मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर उठाना और पार्टी को उस क्षेत्र में मजबूत करना है।
कौन हैं राजेंद्र जैन?
गोंदिया-भंडारा क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले राजेंद्र जैन, एनसीपी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। वे वर्ष 2004 में पहली बार स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) चुने गए थे। इसके बाद 2010 में पुनः निर्वाचित होकर उन्होंने लगभग 12 वर्षों तक सदन में अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।