वसई। बीते हफ्ते हुई मूसलाधार बारिश आफत बनकर बरसी है। भारी बरसात के कारण वसई तालुका में बहने वाली तानसा नदी में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नदी के तेज और उग्र बहाव की चपेट में आने से भाताणे और उसगांव समेत कुल पांच गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाला ‘पांढरतारा पुल’ का एक बड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह ढह गया। पुल के इस तरह क्षतिग्रस्त होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से इस रास्ते पर गाड़ियों की आवाजाही के साथ-साथ पैदल चलने पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी है।
इन गांवों का टूटा संपर्क, दैनिक जीवन हुआ अस्त-व्यस्त
इस हादसे के कारण थळ्याचापाड़ा, हत्तीपाड़ा, भाताणे, नवसई और आडणे जैसे गांवों का संपर्क बाकी दुनिया से लगभग कट चुका है। अब इन इलाकों में रहने वाले लोगों को विरार, वसई, अंबाडी या भिवंडी की तरफ जाने के लिए करीब 20 से 25 किलोमीटर का लंबा और अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। इस संकट की वजह से स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों, नौकरीपेशा वर्ग और आम ग्रामीणों को रोज भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने लगाई गुहार, पर बारिश बनी रुकावट
क्षेत्र के निवासी लक्ष्मीप्रसाद पाटील ने अपनी परेशानी साझा करते हुए कहा कि यह पुल उनके गांवों की लाइफलाइन (मुख्य संपर्क मार्ग) था। इसके बह जाने से अब रोज की भागदौड़ बेहद कठिन और थकाऊ हो गई है। ग्रामीणों का न सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है, बल्कि जेब पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द यहां किसी वैकल्पिक रास्ते या पुल की मरम्मत की मांग की है। हालांकि, मौसम के तल्ख तेवरों और लगातार हो रही बारिश की वजह से रिपेयरिंग का काम कब तक शुरू हो पाएगा, इस पर फिलहाल असमंजस बरकरार है।
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