भाईंदर:
मिरा रोड पश्चिम इलाके में स्थित करीब 318 एकड़ की बेशकीमती भूमि को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर महाराष्ट्र सरकार ने एक बहुत बड़ा और कड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। विधानसभा सत्र के दौरान राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुळे द्वारा दिए गए कड़े दिशा-निर्देशों के बाद, प्रशासन ने इस पूरी जमीन को क्लास-2 (वर्ग-2) की श्रेणी में शामिल कर सीधे सरकारी नियंत्रण में ले लिया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इस जमीन पर किसी भी तरह का मालिकाना हक, लेन-देन या विकास कार्य नहीं किया जा सकेगा।
15,000 करोड़ रुपये है बाजार मूल्य, एलिवेटेड रोड के कारण बढ़ा महत्व
यह पूरी जमीन तटीय नियमन क्षेत्र (CRZ-2) के अंतर्गत आती है, जिसका अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 15 हजार करोड़ रुपये आंका जा रहा है। हालांकि, एक निजी संस्था इस जमीन पर अपना मालिकाना दावा ठोकती आ रही है। चूंकि यह भूमि मूल रूप से लीज (पट्टे) से जुड़ी हुई है और इसे लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं, इसलिए राज्य सरकार ने पूरे मामले की नए सिरे से गंभीर समीक्षा की। इसके अलावा, मुंबई-भाईंदर को जोड़ने वाली प्रस्तावित ‘दहिसर-भाईंदर एलिवेटेड रोड परियोजना’ भी इसी क्षेत्र से गुजरने वाली है, जिसने इस जमीन की अहमियत को कई गुना बढ़ा दिया है।
मलबा भरने की आड़ में खेल: सरकारी राजस्व को लगा चूना
जांच में एक बड़ा खेल भी सामने आया है। साल 2024 में मिरा-भाईंदर महानगरपालिका ने कुछ तय शर्तों के साथ इस दलदली क्षेत्र में केवल मलबा (डेब्रिज) डालने की अनुमति दी थी। मंजूरी के वक्त संबंधित संस्था ने अदालती आदेश और कई दस्तावेज भी दिखाए थे। लेकिन धरातल पर जांच के दौरान पता चला कि जहां केवल मलबा डालने की अनुमति थी, वहां नियमों का उल्लंघन कर कथित रूप से मिट्टी का भराव कर दिया गया। राजस्व विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट में इस भारी अनियमितता का साफ जिक्र किया गया है, जिससे सरकारी खजाने (राजस्व) को बड़ा नुकसान पहुंचने की बात भी उजागर हुई है। इस गड़बड़ी को लेकर स्थानीय नागरिकों ने भी पुरजोर आवाज उठाई थी।
वर्ग-2 में शामिल करने की प्रक्रिया पूरी: अधिकारी
ठाणे के निवासी उपजिल्हाधिकारी संदीप माने ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि मिरा रोड पश्चिम की इस विवादित जमीन को वर्ग-2 (सरकारी नियंत्रण) में शामिल करने की प्रशासनिक कानूनी प्रक्रिया करीब 15 दिन पहले ही पूरी कर ली गई है। फिलहाल, इस पूरे जमीन घोटाले और लीज के नियमों के उल्लंघन से जुड़े सभी पहलुओं की उच्च प्रशासनिक स्तर पर आगे भी बारीकी से जांच और समीक्षा की जा रही है।
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