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वसई में कुदरत का कहर: बाढ़ के पानी में सड़ गई धान की फसल, दाने-दाने को मोहताज अन्नदाता, दोबारा बुवाई की चुनौती

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वसई:

पिछले दिनों वसई-विरार क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश और उसके बाद आए विनाशकारी सैलाब ने स्थानीय किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। बाढ़ का पानी हटने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे कई गांवों के धान के खेत हफ्तों से जलमग्न हैं। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण धान की नर्सरी (पौधशाला) और छोटे पौधे पूरी तरह सड़ चुके हैं। इस प्राकृतिक आपदा के कारण अब किसानों के सामने खरीफ सीजन में दोबारा से बुवाई करने का एक बहुत बड़ा और बेहद चुनौतीपूर्ण संकट खड़ा हो गया है।

मानसून ने पहले ही तरसाया, अब बाढ़ ने सब कुछ बहाया

वसई तालुका पूरे पालघर जिले में उत्तम धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ के किसान खेती शुरू करने से पहले हफ्तों तक कड़ी मेहनत करके खेतों की सफाई, समतलीकरण, खाद प्रबंधन और उन्नत बीजों का उपचार करते हैं। इस साल वैसे भी मानसून की देरी से आमद के कारण खेती का काम समय से पिछड़ गया था। बाद में जैसे ही बारिश ने रफ्तार पकड़ी, किसानों ने दिन-रात एक करके बुवाई शुरू की। कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र के करीब 50 से 60 प्रतिशत हिस्से में बुवाई का काम सफलतापूर्वक पूरा भी हो चुका था, लेकिन तभी आई अप्रत्याशित बाढ़ ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया।

फसल का चक्र बिगड़ा, 20 दिन की होगी देरी

परेशान किसानों का कहना है कि खेतों में बीज डालने के बाद वे रोपाई (ट्रांसप्लांटेशन) की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन लगातार जलभराव ने अंकुरित हो रही फसल को खेत में ही नष्ट कर दिया। अब किसानों को नए सिरे से महंगे बीज खरीदने होंगे और फिर से नई नर्सरी तैयार करनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम 20 दिनों का अतिरिक्त समय बर्बाद होगा, जिससे इस साल धान की खेती का पूरा प्राकृतिक चक्र ही बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

बढ़ती लागत और कर्ज के बोझ से सहमा अन्नदाता

महंगे बीजों की खरीद, ट्रैक्टर का किराया, मजदूरों की बढ़ती मजदूरी और खाद की ऊंची कीमतों के कारण किसान पहले से ही भारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे थे। अब पहली फसल बर्बाद होने से उनका पुराना निवेश मिट्टी में मिल गया है। किसानों का कहना है कि दोबारा बुवाई के लिए नए सिरे से फंड और अतिरिक्त खर्च जुटाना उनके बस से बाहर हो रहा है, जिससे खेती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

कृषि विभाग ने शुरू किया नुकसान का पंचनामा

इस बीच, स्थानीय कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों को सांत्वना देते हुए बताया है कि बाढ़ प्रभावित सभी ग्रामीण इलाकों में फसलों के नुकसान का जायजा (सर्वे) लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिन भी किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं, उन्हें सरकारी नियमों के अनुसार जल्द से जल्द आर्थिक राहत और मुआवजा दिलाने की तैयारी की जा रही है। कृषि विभाग ने सभी पीड़ित किसानों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन और ग्राम सेवकों के निरंतर संपर्क में रहें और अपने नुकसान का पूरा विवरण समय पर दर्ज कराएं।

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Rajesh