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मुंबई मेट्रो लाइन 5: कशेली डिपो का निर्माण कार्य तेज, ठाणे-भिवंडी-कल्याण रूट पर जल्द दौड़ेंगी ट्रेनें |

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मुंबई महानगर क्षेत्र में यातायात को और अधिक सुगम बनाने के लिए मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) लगातार प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में मुंबई मेट्रो लाइन 5 (ठाणे-भिवंडी-कल्याण-उल्हासनगर कॉरिडोर) के लिए सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव माने जा रहे ‘कशेली मेट्रो डिपो’ के निर्माण कार्य में तेजी ला दी गई है। यह डिपो इस पूरे रूट की लाइफलाइन बनने जा रहा है, जिसका जून 2026 तक लगभग 23 फीसदी भौतिक काम पूरा हो चुका है। बता दें कि इस बेहद खास प्रोजेक्ट को अगस्त 2025 में पर्यावरण मंजूरी मिली थी।

27 हेक्टेयर में फैलेगा अत्याधुनिक डिपो

कशेली टोल प्लाजा के पास करीब 27 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में बन रहा यह डिपो लगभग 32 किलोमीटर लंबे मेट्रो कॉरिडोर की भविष्य की सभी जरूरतों को पूरा करेगा। ट्रेनों की जांच, रखरखाव और उनकी टेस्टिंग समय पर हो सके, इसके लिए एमएमआरडीए ने चरणबद्ध (Phase-wise) निर्माण की रणनीति अपनाई है। इसका बड़ा फायदा यह होगा कि डिपो का पूरा निर्माण कार्य खत्म होने से पहले ही ट्रेनों की टेस्टिंग और रख-रखाव से जुड़े काम शुरू किए जा सकेंगे, जिससे कॉरिडोर को जल्द से जल्द आम जनता के लिए खोला जा सके।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा इंटीग्रेटेड सेंटर

कशेली डिपो को एक स्मार्ट और पूर्णतः एकीकृत (Integrated) रखरखाव केंद्र के रूप में डिजाइन किया गया है। इसमें मेट्रो के सुचारू संचालन के लिए निम्नलिखित अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी:

  • बड़ी क्षमता: एक साथ लगभग 30 ट्रेनसेट को खड़ा (Stabilization) करने की व्यवस्था।
  • मेंटेनेंस शेड्स: 5 निरीक्षण बे लाइन और 4 अत्याधुनिक वर्कशॉप लाइनों का निर्माण।
  • कंट्रोल और स्टोरेज: एक आधुनिक डिपो नियंत्रण केंद्र (DCC), प्रशासनिक इमारत और विशेष स्टोरेज ब्लॉक।
  • इको-फ्रेंडली सिस्टम: वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), सीवेज और अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (STP)।
  • अन्य सुविधाएं: कर्मचारी आवास, समर्पित परीक्षण ट्रैक, स्वचालित ट्रेन वाशिंग सिस्टम और उन्नत अग्निशमन प्रणालियां।

चुनौतीपूर्ण जमीन पर उन्नत इंजीनियरिंग का कमाल

इस प्रोजेक्ट की राह में सबसे बड़ी चुनौती यहां की भौगोलिक स्थिति थी। परियोजना स्थल पर जमीन से 6 से 9 मीटर नीचे तक बेहद नरम समुद्री चिकनी मिट्टी मौजूद है। इस समस्या से निपटने और जमीन की भार-वहन क्षमता को मजबूत करने के लिए एमएमआरडीए ने आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के विशेषज्ञों की मदद ली है। यहां आधुनिक ‘प्रीफैब्रिकेटेड वर्टिकल ड्रेन्स’ (PVDs) तकनीक और चरणबद्ध सरचार्ज लोडिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। शुरुआती चरण में 10 हेक्टेयर भूमि को इस तकनीक से सुधारा गया है, जहां 6.2 मीटर ऊंचे तटबंध बनाए गए हैं।

युद्ध स्तर पर जारी है मुख्य निर्माण कार्य

डिपो के अलग-अलग हिस्सों पर काम एक साथ चल रहा है। वर्तमान में चार मंजिला डिपो नियंत्रण केंद्र और स्टाफ क्वार्टर की नींव का काम प्रगति पर है। इससे पहले, नवंबर 2025 में बीएमसी (BMC) की 2400 मिमी और 2750 मिमी व्यास वाली विशाल पानी की पाइपलाइनों को सुरक्षित रूप से नीचे शिफ्ट करने का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।

अंतरिम परिचालन के लिए अस्थायी व्यवस्था

मेट्रो सेवाओं को बिना किसी देरी के शुरू करने के लिए एमएमआरडीए स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ कुछ अस्थायी शेड और टेस्ट ट्रैक भी तैयार कर रहा है। इससे डिपो का पूरा काम खत्म होने का इंतजार किए बिना ही शुरुआती फेज में ट्रेनों का ट्रायल और कमीशनिंग शुरू हो सकेगी।

परियोजना पर क्या है नेतृत्व का कहना?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस: “कशेली डिपो राज्य में आधुनिक और विश्वस्तरीय पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की हमारी प्रतिबद्धता का उदाहरण है। मेट्रो लाइन 5 ठाणे, भिवंडी, कल्याण और उल्हासनगर के बीच कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देगी, जो हमारे विकसित महाराष्ट्र के सपने को साकार करने में मदद करेगी।”

उपमुख्यमंत्री एवं अध्यक्ष (MMRDA) एकनाथ शिंदे: “कशेली डिपो मेट्रो लाइन 5 के सुरक्षित और कुशल संचालन का मुख्य केंद्र होगा। इसकी तेज प्रगति मुंबई महानगर क्षेत्र के नागरिकों को एक विश्वसनीय, तेज और उच्च क्षमता वाली परिवहन सेवा के और करीब ले जा रही है।”

डॉ. संजय मुखर्जी (महानगर आयुक्त, MMRDA): “कशेली डिपो इस मेट्रो लाइन की रीढ़ है। जमीन की कठिन चुनौतियों के बावजूद आईआईटी के सहयोग और वैज्ञानिक इंजीनियरिंग के जरिए हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं। यह डिपो आने वाले कई दशकों तक मुंबई और उपनगरों की मेट्रो सेवाओं को मजबूती प्रदान करेगा।”

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Rajesh