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टीपीएस कॉलेज में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ सर्टिफिकेट कोर्स का आगाज़; NEP-2020 के तहत नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने की पहल |

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पटना (ब्यूरो चीफ: विनोद प्रसाद – तृप्ति प्रमाण):

राजधानी पटना के प्रतिष्ठित ठाकुर प्रसाद सिंह (टी.पी.एस.) कॉलेज में सोमवार को एक ऐतिहासिक शैक्षणिक पहल की शुरुआत हुई। महाविद्यालय के इतिहास विभाग द्वारा ‘आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ’ (IQAC) के तत्वावधान में 40 घंटे के “भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System-IKS)” प्रमाण-पत्र पाठ्यक्रम का भव्य एवं गरिमामय शुभारम्भ कौटिल्य सभागार में किया गया।

आधुनिक शिक्षा और ज्ञान परंपरा का संगम: प्राचार्य प्रो. शांडिल्य

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) तपन कुमार शांडिल्य ने भारतीय ज्ञान परंपरा को भारत की सांस्कृतिक और बौद्धिक पहचान की आत्मा बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP-2020) का मूल ध्येय प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साथ एकीकृत करना है। इससे विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक सोच और सांस्कृतिक चेतना का सर्वांगीण विकास होगा। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हमारी ज्ञान परंपरा केवल इतिहास का पन्ना नहीं, बल्कि भविष्य का मार्गदर्शन करने वाला दीपपुंज है।

7 दिनों तक चलेगा विशेष शैक्षणिक सत्र

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक रीति-रिवाज के साथ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुई। पाठ्यक्रम के समन्वयक एवं इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत कुमार ने स्वागत भाषण दिया और आगामी सात दिवसीय (20 जुलाई से 27 जुलाई 2026 तक) कार्यशाला के स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस 40 घंटे के सर्टिफिकेट कोर्स के दौरान विशेषज्ञ वक्ता भारतीय दर्शन, प्राचीन विज्ञान, सुशासन, पर्यावरण संरक्षण, योग, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक चेतना जैसे गहन विषयों पर विशेष व्याख्यान देंगे।

वरिष्ठ प्राध्यापकों और विद्वानों का मिला सानिध्य

उद्घाटन सत्र में IQAC समन्वयक प्रो. रूपम, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेजेस प्रो. कृष्णनंदन प्रसाद, शिक्षक संघ अध्यक्ष प्रो. विजय सिन्हा, हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. शशि भूषण चौधरी तथा वनस्पति विज्ञान के डॉ. विनय भूषण ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने समकालीन समय में भारतीय ज्ञान की उपयोगिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।

शिक्षक व छात्रों की गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों से डॉ. ओंकार, डॉ. अश्विनी, डॉ. सुशोभन पलाधी, डॉ. उमेश, डॉ. नूतन, डॉ. दीपिका शर्मा, डॉ. हंस, डॉ. चंद्रशेखर और डॉ. शशि शेखर सहित अनेक शिक्षक व कर्मचारी मौजूद रहे। मंच संचालन डॉ. प्रशांत कुमार ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. मुकुंद कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस नए पाठ्यक्रम को लेकर छात्र-छात्राओं में भारी उत्साह देखा गया और बड़ी संख्या में पंजीकृत विद्यार्थियों ने पहले दिन उपस्थिति दर्ज कराई।

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Rajesh