जौनपुर (केराकत)। क्या जौनपुर का स्वास्थ्य विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या इलाज के नाम पर मरीजों और गर्भवती महिलाओं की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है? केराकत स्थित ‘दुर्गावती पॉली क्लिनिक’ को लेकर सामने आ रहे नए दावों ने स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यशैली और मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीलिंग के बावजूद दोबारा संचालन का आरोप
स्थानीय निवासियों और सूत्रों का दावा है कि जिस दुर्गावती पॉली क्लिनिक को कुछ समय पहले नियमों के उल्लंघन पर सील किया गया था, वह एक बार फिर धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। जब मीडिया टीम ने मौके का जायजा लिया, तो वहां कोई भी अधिकृत डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। आरोप है कि पूरा अस्पताल केवल नर्सिंग स्टाफ के भरोसे चलाया जा रहा था। भर्ती काउंटर पर तैनात कर्मचारी ने क्लिनिक के पूर्व में सील होने की जानकारी से साफ इंकार कर दिया।
बिना डॉक्टर के मरीजों का इलाज, जिम्मेदार कौन?
इस पूरे मामले ने कई यक्ष प्रश्न खड़े कर दिए हैं:
- यदि क्लिनिक को पूर्व में सील किया गया था, तो यह दोबारा कैसे खुला?
- क्या स्वास्थ्य विभाग ने कोई आधिकारिक जांच या री-निरीक्षण किया था?
- क्या यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा का कोई इंतजाम है?
स्वास्थ्य विभाग की रहस्यमयी खामोशी
मामले की सत्यता जानने और विभाग का पक्ष लेने के लिए जब संबंधित सीएमएस (CMS) से बार-बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव करना भी उचित नहीं समझा। जनहित और स्वास्थ्य से जुड़े इतने संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासनिक अधिकारियों की यह चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा करती है।
जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है कि आखिर यह खामोशी किसकी शह पर है? अगर आरोप सही हैं, तो दोषी संचालकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई कब होगी?
(ब्यूरो चीफ: दिलीप कुमार, तृप्ति प्रमाण, जौनपुर)