मुंबई, 11 जनवरी 2026: भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा में धर्म की स्वतंत्रता, मानवता और सत्य की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर करने वाले महान आध्यात्मिक नेता श्री गुरु तेगबहादुर साहिब जी के 350वें शहीदी समागम को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। महाराष्ट्र राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यभर में व्यापक एवं सार्थक कार्यक्रमों का आयोजन करने का निर्णय लिया है।
इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु राज्य स्तर, विभाग स्तर और जिला स्तर पर समन्वय समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों के माध्यम से गुरुजी के विचारों एवं बलिदान को जन-जन तक पहुँचाने के लिए विविध जनभागीदारी आधारित पहलों को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा रहा है।
श्री गुरु तेगबहादुर साहिब जी सिख धर्म के नौवें गुरु थे। उन्होंने किसी एक समुदाय या धर्म के लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों के अधिकार और मानवता की रक्षा के लिए अपना अंतिम बलिदान दिया। औरंगज़ेब के शासनकाल में कश्मीरी पंडितों पर जबरन धर्मांतरण के खिलाफ उन्होंने साहसपूर्वक प्रतिरोध किया। उनका कथन — “तिलक और जनेऊ की रक्षा के लिए मेरा सिर कट जाए, पर धर्म की रक्षा होगी” — आज भी धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक मूल्य का प्रतीक माना जाता है।
इस 350वें शहीदी समागम के तहत देश-विदेश में अखंड पाठ, कीर्तन, गुरबाणी आधारित चर्चा, रक्तदान शिविर, निःशुल्क स्वास्थ्य जाँच, शैक्षिक कार्यशालाएँ, स्वच्छता अभियान और सामूहिक लंगर जैसे सामाजिक उपक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ये गतिविधियाँ न केवल आस्था को जगा रही हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के संदेश को भी मजबूत कर रही हैं।
गुरु तेगबहादुर साहिब जी को “हिंद दी चादर” की उपाधि से सम्मानित किया जाता है। उनका जीवन अन्याय के सामने डटकर खड़े होने, सत्य के लिए त्याग करने और मानवीय मूल्यों की रक्षा करने की प्रेरणा देता है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में उनके विचारों की प्रासंगिकता और भी अधिक है।
यह समागम केवल एक स्मारकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सहिष्णुता, संवैधानिक मूल्य, सामूहिक सद्भाव और सर्वसमावेशी दृष्टिकोण की विरासत सौंपने का एक सशक्त माध्यम है। गुरुजी का जीवन सिखाता है कि सत्ता से ऊपर सत्य है और किसी भी धर्म से बड़ी मानवता है।
श्री गुरु तेगबहादुर साहिब जी का 350वाँ शहीदी समागम, बलिदान से प्रज्वलित मानवता की एक अमर ज्योति है, जो भारत को एकता, बंधुत्व और धार्मिक स्वतंत्रता के मार्ग पर अग्रसर रहने की प्रेरणा देती है।
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राहुल भालेराव
जिला सूचना अधिकारी
पालघर