नई दिल्ली, : पालघर लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. हेमंत विष्णु सवरा ने आज लोकसभा के शून्य काल के दौरान महाराष्ट्र के मछुआरे समुदाय से जुड़ी एक गंभीर आर्थिक चुनौती को सदन के समक्ष रखा। उन्होंने केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग की कि महाराष्ट्र की मछुआरे सहकारी संस्थाओं को ‘बल्क कंज्यूमर’ श्रेणी से तत्काल हटाया जाए, क्योंकि इस वर्गीकरण के कारण इन्हें बाजार दर से कहीं अधिक मूल्य पर डीजल खरीदना पड़ रहा है।
सांसद डॉ. सवरा ने सदन को अवगत कराया कि वर्तमान में मछुआरे सोसाइटियों को 113 रुपये प्रति लीटर की दर से डीजल उपलब्ध हो रहा है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत लगभग 87 रुपये प्रति लीटर है। इस 26 रुपये प्रति लीटर के अंतर का सीधा प्रभाव छोटे और पारंपरिक मछुआरों पर पड़ रहा है, जिनकी आजीविका पहले से ही मौसम, बाजार और संसाधनों की चुनौतियों से जूझ रही है।
डॉ. सवरा ने तर्कपूर्ण ढंग से स्पष्ट किया कि मछुआरे सहकारी संस्थाएं बड़े औद्योगिक उपभोक्ता नहीं हैं, बल्कि ये आर्थिक रूप से कमजोर मछुआरे परिवारों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने गुजरात सरकार के सकारात्मक उदाहरण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां मछुआरे सोसाइटियों को इस श्रेणी से बाहर कर उचित राहत प्रदान की गई है। महाराष्ट्र में भी इसी दिशा में त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता है।
सांसद ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री से निम्नलिखित तीन प्रमुख मांगें रखीं:
महाराष्ट्र की मछुआरे सोसाइटियों को ‘बल्क कंज्यूमर’ श्रेणी से तत्काल हटाया जाए।
इन्हें एक विशेष श्रेणी में वर्गीकृत कर रियायती दर पर डीजल उपलब्ध कराया जाए।
तेल विपणन कंपनियों (IOCL, HPCL, BPCL, RIL) को इन संस्थाओं को उचित रियायत देने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।
डॉ. सवरा ने विश्वास व्यक्त किया कि इस मांग के स्वीकार होने से महाराष्ट्र के पारंपरिक मत्स्य व्यवसाय और उससे जुड़े लाखों परिवारों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी, जिससे उनकी आजीविका सुदृढ़ होगी और तटीय क्षेत्रों का समग्र विकास संभव होगा।
डॉ. हेमंत विष्णु सवरा
सांसद, पालघर लोकसभा क्षेत्र