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खादी महोत्सव-2025: मुरादाबाद में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच चौड़ा अंतर |

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तृप्ति प्रमाण – राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक

मुरादाबाद, 17 दिसंबर 2024

मुरादाबाद में आयोजित ‘खादी महोत्सव-2025’ के दूसरे दिन मंगलवार को आयोजकों के दावों और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा अंतर सामने आया। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने प्रदर्शनी में भीड़-भाड़ और सक्रिय बाजार का दावा किया, लेकिन परिसर में दिनभर सूनापन छाया रहा और अधिकांश स्टाल बिना ग्राहकों के रहे।

इस महोत्सव का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और लघु उद्यमियों को सीधे बाजार उपलब्ध कराना, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना तथा सरकारी योजनाओं की जानकारी देना बताया गया है। हालांकि, दूसरे दिन सुबह से शाम तक प्रदर्शनी स्थल युवा केंद्र, दीनदयाल नगर पर आगंतुकों की संख्या बेहद सीमित रही।

स्थानीय स्तर पर खादी संस्थानों के स्टाल जैसे शुभम खादी ग्रामोद्योग संस्थान, क्षेत्रीय गांधी आश्रम, अवध युवा कल्याण ग्रामोद्योग और छजलैट के स्टाल सुनसान दिखे। दिल्ली से आई फाइवर गोल्ड संस्था की अध्यक्ष रितू ने बताया कि उनके जूट के थैले और अन्य उत्पाद तैयार हैं, लेकिन बिक्री लगभग शून्य है।

आयोजन का हिस्सा जागरूकता मंच भी सन्नाटे में रहा। शाम चार बजे गंगा आरोग्य धाम के बच्चों के फैशन शो को कम दर्शकों के कारण प्रभावहीन माना गया। न तो समय-समय पर घोषणाएं हुईं, और न ही आगंतुकों को आकर्षित करने की कोई प्रभावी व्यवस्था दिखी।

खादी विभाग के अधिकारी रात में भीड़ के दावे कर रहे हैं, लेकिन परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी सत्यपाल सिंह के अनुसार, “दिन में भीड़ कम रही होगी, शाम को कुछ लोग आए थे।” यह बयान आधिकारिक आंकड़ों से अलग है।

स्थानीय निवासियों और प्रदर्शकों ने प्रचार-प्रसार की कमजोरी की ओर इशारा किया। शहर के प्रमुख चौराहों पर होर्डिंग्स की संख्या सीमित थी और सोशल मीडिया या स्थानीय स्तर पर कोई जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया। इसके कारण आम जनता तक आयोजन की जानकारी नहीं पहुंच पाई।

महोत्सव से कारीगरों को आय और बाजार तक पहुंच की उम्मीद थी, लेकिन विफल प्रबंधन ने उनकी उम्मीदों को धूमिल कर दिया। कई प्रदर्शकों ने बताया कि वे दूर से सामान लेकर आए हैं, लेकिन बिक्री न होने से निवेश के नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।

यह आयोजन 24 दिसंबर तक चलेगा। सूत्रों के मुताबिक, यदि प्रचार, कार्यक्रम योजना और जमीनी व्यवस्थाओं में तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो यह महोत्सव एक “शो-पीस” बनकर रह सकता है। वर्तमान में, जांच जारी है कि आगे के दिनों में आयोजन को प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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Rajesh