मुंबई, दिनांक 6: राज्य में पीएनजी कनेक्शन की संख्या 25.36 लाख से अधिक हो गई है और एक महीने में 73 हजार नए कनेक्शन दिए गए हैं। सीजीडी पाइपलाइन के लिए ‘डीम्ड परमिशन’ देने का निर्णय लेने से नेटवर्क विस्तार को गति मिलेगी। जिन स्थानों पर पीएनजी नेटवर्क पहुंच चुका है, वहां ग्राहकों के लिए पंजीकरण करना आवश्यक है। जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन बिछाना संभव नहीं है, वहां एलपीजी की आपूर्ति पूर्ववत जारी रहेगी। महाराष्ट्र में एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति सुचारू रूप से चल रही है, यह जानकारी खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं ग्राहक संरक्षण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिल डिग्गीकर ने दी।
मंत्रालय में आयोजित पत्रकार परिषद में अपर मुख्य सचिव डिग्गीकर ने यह जानकारी दी। इस अवसर पर राशन नियंत्रक चंद्रकांत डांगे, सूचना एवं जनसंपर्क महानिदेशालय के प्रधान सचिव एवं महानिदेशक ब्रिजेश सिंह, ‘पीआईबी’ की महानिदेशक स्मिता वत्स-शर्मा, तेल उत्पादक राज्य समन्वयक उमेश कुलकर्णी, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, कृषि निदेशक सुनील बोरकर सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
पीएनजी एवं सीजीडी नेटवर्क को बढ़ावा
मध्य पूर्व में वर्तमान भू-राजनीतिक तनाव के कारण पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला पर कुछ दबाव बना हुआ है, लेकिन राज्य में आपूर्ति सुचारू बनी हुई है, यह बताते हुए अपर मुख्य सचिव डिग्गीकर ने कहा कि जहां-जहां संभव होगा, वहां पीएनजी के उपयोग को बढ़ाया जाएगा। जिन स्थानों पर पाइपलाइन गैस आपूर्ति संभव है, वहां 30 जून तक पीएनजी अनिवार्य होगा। जिन क्षेत्रों में पीएनजी पाइपलाइन बिछाना संभव नहीं है, वहां एलपीजी की आपूर्ति पूर्ववत जारी रहेगी। पीएनजी कनेक्शन जिन क्षेत्रों में उपलब्ध हैं, वहां इसके उपयोग को बढ़ावा देना है। ग्राहकों की दृष्टि से देखें तो पीएनजी सस्ता है और इसका घरेलू उत्पादन अधिक है। पीएनजी नेटवर्क जहां पहुंच चुका है, वहां ग्राहकों को पंजीकरण करना चाहिए, ऐसा अपर मुख्य सचिव डिग्गीकर ने इस अवसर पर कहा।
राज्य में लगभग 24 तेल डिपो के माध्यम से 8,100 पेट्रोल पंपों को सेवा प्रदान की जा रही है और प्रतिदिन लगभग 18,500 किलोलीटर पेट्रोल तथा 40,000 किलोलीटर डीजल का वितरण किया जा रहा है। 1 से 4 अप्रैल के दौरान बिक्री भी पिछले महीनों के औसत के अनुरूप है, इसलिए ईंधन की कमी की स्थिति नहीं है।
एलपीजी आपूर्ति नियंत्रण में; डिजिटल बुकिंग को प्रोत्साहन
राशन नियंत्रक श्री डांगे ने बताया कि राज्य के 23 बॉटलिंग प्लांट के माध्यम से लगभग 2,200 वितरकों और 3.5 करोड़ ग्राहकों को सेवा प्रदान की जा रही है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और प्रतिदिन औसतन 5.82 लाख रिफिल वितरित किए जा रहे हैं। वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) को अनिवार्य किया गया है।
ग्राहकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही बुकिंग करने का आह्वान किया गया है और वर्तमान में 95 प्रतिशत बुकिंग ऑनलाइन हो रही है। न्यायसंगत वितरण के लिए बुकिंग अंतराल प्रतिबंध लागू किए गए हैं।
व्यावसायिक एलपीजी आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से
व्यावसायिक एलपीजी का आवंटन चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया है। अत्यावश्यक सेवा क्षेत्रों को 100 प्रतिशत आपूर्ति, जबकि रक्षा, रेलवे, पुलिस जैसे विभागों को 70 प्रतिशत आपूर्ति आरक्षित रखी गई है। उद्योग और अन्य क्षेत्रों को 20 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक आपूर्ति प्रदान की जा रही है।
केंद्र सरकार के निर्देशानुसार होटल, रेस्तरां, औद्योगिक कैंटीन, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आदि क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर अतिरिक्त 20 प्रतिशत आवंटन किया गया है।
कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई
घरेलू गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए राज्य भर में निगरानी दल गठित किए गए हैं। 1 मार्च से 6 अप्रैल के दौरान 14,329 जांच और छापेमारी के तहत 3,628 सिलेंडर जब्त किए गए हैं।
कार्रवाई के दौरान 21 परिवहन वाहन जब्त किए गए हैं और 2 गैस कैप्सूल/टैंकर भी हिरासत में लिए गए हैं। जब्त किए गए एलपीजी गैस की कुल मात्रा 71,565.14 किलो है। इन मामलों में 53 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 36 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। इस संपूर्ण कार्रवाई में जब्त किए गए गैस और वाहनों की कुल अनुमानित कीमत 2 करोड़ 38 लाख 54 हजार 493 रुपये है।
नियंत्रण कक्ष एवं शिकायत निवारण तंत्र सक्रिय
राज्य, संभाग, जिला और तहसील स्तर पर नियंत्रण कक्ष शुरू किए गए हैं। एलपीजी आपूर्ति से संबंधित शिकायतों के लिए 9769919221 यह व्हाट्सएप नंबर जारी किया गया है। 17 मार्च से 6 अप्रैल के दौरान 2,409 शिकायतें प्राप्त हुई हैं और उन पर कार्रवाई जारी है।