मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों के साथ-साथ ऑटो रिक्शा भी महानगर और आसपास के इलाकों में लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का अहम साधन है। हर दिन लाखों यात्री घर से काम और अन्य जगहों तक पहुंचने के लिए ऑटो का सहारा लेते हैं। इसी बीच महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो रिक्शा परमिट को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य में फिलहाल नए ऑटो परमिट जारी करने की प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक सरकार को कुछ ऐसी शिकायतें मिली थीं जिनमें कहा गया था कि संदिग्ध और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों तक भी ऑटो परमिट पहुंच रहे हैं। कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई के दौरान ऐसे लोगों को पकड़ा गया, जिनके पास ऑटो परमिट और पहचान पत्र मौजूद थे। बताया गया कि इनमें कुछ बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल थे। इन परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने नए परमिट जारी करने पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला किया है और इस संबंध में नए नियम तैयार कर कैबिनेट में पेश करने की तैयारी चल रही है। दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस विधायक असलम शेख का कहना है कि ऑटो और टैक्सी परमिट जारी करने से पहले शहर की सड़कों की क्षमता, बढ़ते ट्रैफिक और आबादी का गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बांग्लादेशी घुसपैठ की बात सामने आ रही है तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार दोनों को लेनी चाहिए और जनता को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आजमी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि बांग्लादेशी नागरिकों के नाम पर अनावश्यक माहौल बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि अगर वास्तव में सीमा पार से लोग देश में आ रहे हैं तो सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और उन्हें पहचान पत्र उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक ट्रैफिक की समस्या का हल परमिट बंद करना नहीं बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है। फिलहाल ऑटो परमिट पर लगी रोक प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुकी है। सरकार जहां इसे सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे शासन की विफलता करार दे रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित नए नियम इस विवाद को शांत करेंगे या फिर राजनीतिक बहस को और तेज कर देंगे।
मुंबई/महाराष्ट्र | तृप्ति प्रमाण – राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक संवाददाता: साहिल यादव |