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महासंघ (गोप गुट) ने अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों और छात्रों के शोषण पर रोक लगाने की मांग की |

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पटना। महासंघ (गोप गुट) ने बिहार सरकार से राज्य में संचालित 91 अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में फैली कुव्यवस्थाओं को दूर करने और शिक्षकों एवं छात्रों के शोषण पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन के महासचिव प्रेमचंद कुमार सिन्हा ने बिहार के मुख्यमंत्री तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री को एक पत्र लिखकर इन विद्यालयों की गंभीर स्थिति से अवगत कराया है।
पत्र में बताया गया है कि अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों की पढ़ाई की दिनचर्या अन्य प्रतिष्ठित आवासीय विद्यालयों से काफी अलग है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) में निर्धारित मानकों का उल्लंघन इन विद्यालयों में आम बात हो गई है। विभाग द्वारा आवासीय विद्यालयों के लिए स्वीकृत शैक्षणिक पदों में से लगभग 50 प्रतिशत और गैर-शैक्षणिक पदों में से 90 प्रतिशत पद वर्तमान में रिक्त हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है।
रिक्त पदों से जूझ रहा है विभाग
महासचिव प्रेमचंद कुमार सिन्हा के अनुसार, लिपिक संवर्ग के अधिकांश पद रिक्त हैं और जो कर्मचारी पदस्थापित हैं, उन्हें अन्यत्र प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। इससे कार्यालयीन कार्यवाही और वेतन भुगतान में लगातार कठिनाई हो रही है। आवासीय विद्यालय होने के बावजूद छात्रावास प्रबंधक, पुस्तकालय अधीक्षक और प्रयोगशाला सहायक जैसे महत्वपूर्ण पद खाली रखना इस बात का संकेत है कि विभाग छात्रों की शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
पत्र में यह भी उजागर किया गया है कि भीषण गर्मी में छोटे बच्चों को टीन शेड वाले कमरों में पढ़ाई करनी पड़ रही है, जो उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। महासंघ ने इसे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की है।
शिक्षकों पर दबाव की शिकायत
महासंघ ने आरोप लगाया है कि जब शिक्षक इन समस्याओं को लेकर उच्च अधिकारियों के पास सुझाव या शिकायत ले जाते हैं, तो राज्य सरकार के स्थापित नियमों के विपरीत उनका स्थानांतरण दूरदराज के क्षेत्रों में कर दिया जाता है या उन्हें निलंबन की धमकी दी जाती है। साथ ही, कैंटीन संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर बेकसूर शिक्षकों को निलंबित करने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाने की मांग की गई है।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया, तो आवासीय विद्यालयों के शिक्षक मिलकर बड़ा आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होंगे। विभाग की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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Rajesh