मथुरा/वृन्दावन: भारत की संत परंपरा ने सदैव जन-चेतना को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। इसी पावन परंपरा के धनी, भारत भूमि के महान संत श्रीमद् जगद्गुरु द्वाराचार्य श्रीमलूकदास देवाचार्य जी महाराज की 452वीं जयंती मथुरा-वृन्दावन में हर्ष और उत्साह के साथ मनाई गई।
श्रीमज्जगद्गुरु द्वाराचार्य श्रीअग्रपीठाधीश्वर एवं मलूकपीठाधीश्वर पूज्य संत स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज के सानिध्य में आयोजित श्रीमलूक जयंती महोत्सव व श्री सीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव में भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में पूज्य साधु-संतों एवं धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान संत मलूकदास जी के उपदेशों, उनकी जीवन दर्शन एवं सामाजिक सद्भाव के संदेशों को पुनः स्मरण किया गया। महोत्सव में श्री सीताराम निकुंज अष्टयाम लीला के माध्यम से भगवान श्रीराम एवं माता सीता की दिव्य लीलाओं का भक्तिमय वर्णन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक अनुभव किया।
आयोजन समिति के अनुसार, इस प्रकार के आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना को बल प्रदान करते हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति एवं परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का भी माध्यम बनते हैं। जगद्गुरु मलूकदास जी महाराज की पुण्य स्मृतियों को नमन करते हुए सभी पूज्य संतों एवं आयोजकों का हृदय से अभिनंदन किया गया।
महत्वपूर्ण बिंदु:
आयोजन: श्रीमलूक जयंती महोत्सव व श्री सीताराम निकुंज अष्टयाम लीला महोत्सव
स्थान: मथुरा-वृन्दावन
मुख्य अतिथि: पूज्य संत स्वामी राजेंद्र दास देवाचार्य जी महाराज
विशेषता: 452वीं जयंती, साधु-संतों की गरिमामयी उपस्थिति
Published On: April 8, 2026 9:05 pm
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