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पालघर में स्थलांतरित श्रमिक बच्चों को शिक्षा के द्वार: 14 छात्रों का सरकारी स्कूल में समावेशन |

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पालघर, 9 जनवरी 2026 | तृप्ति प्रमाण राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक

लीड पैराग्राफ:
आर्थिक आवश्यकताओं के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने वाले निर्माण श्रमिकों के बच्चे अक्सर शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। पालघर जिले में अब इस चुनौती को दूर करने के लिए एक सकारात्मक कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्पर्श फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से 14 स्थलांतरित श्रमिक परिवारों के बच्चों को जिला परिषद विद्यालय, आनंदाश्रम में निःशुल्क प्रवेश दिया गया है।

विस्तृत विवरण:
इन बच्चों को केवल प्रवेश ही नहीं दिया गया, बल्कि उन्हें निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और स्कूली वर्दी भी उपलब्ध कराई गई है, ताकि आर्थिक कठिनाइयाँ उनकी शिक्षा में बाधा न बनें। यह पहल शिक्षा के अधिकार को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

जिला कलेक्टर कार्यालय के नेतृत्व में एक त्वरित सर्वेक्षण किया गया, जिसमें उन बच्चों की पहचान की गई जो पलायन के कारण स्कूली शिक्षा से बाहर हो गए थे। स्पर्श फाउंडेशन ने इस प्रक्रिया में समन्वय और समुदाय संवाद की भूमिका निभाई।

आयोजन एवं अतिथि:
एक विशेष कार्यक्रम के माध्यम से जिला कलेक्टर डॉ. इंदू रानी जाखड़ और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे ने इन छात्रों को पाठ्य सामग्री एवं वर्दी सौंपी। इस अवसर पर शिक्षणाधिकारी (प्राथमिक) सोनाली मातकर, खंड शिक्षा अधिकारी निमिष मोहिते, बीट विस्तार अधिकारी नीलम पष्टे, केंद्र प्रमुख विनोद पाटिल, स्पर्श फाउंडेशन के प्रतिनिधि, श्रमिक अभिभावक और नवप्रवेशित छात्र उपस्थित थे।

भावी संभावनाएँ:
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल केवल 14 बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक प्रतिकृति-योग्य मॉडल के रूप में अन्य जिलों में भी अपनाया जा सकता है। समय पर स्थलांतरित परिवारों के बच्चों को स्थानीय सरकारी स्कूलों से जोड़ने से बाल श्रम, अशिक्षा और सामाजिक असमानता जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकता है।

निष्कर्ष:
पालघर की यह पहल यह साबित करती है कि जब प्रशासन, समाज और शिक्षा व्यवस्था एक सूत्र में बँध जाएँ, तो सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

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Rajesh