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पालघर के 92 वर्षीय तारपा कलाकार भिकल्या धिंडा को मिला पद्मश्री सम्मान |

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पालघर जिले के वाळवंडा गाँव निवासी 92 वर्षीय वरिष्ठ आदिवासी कलाकार भिकल्या धिंडा को केंद्र सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा 25 जनवरी को की गई। यह सम्मान उनके द्वारा तारपा वाद्य कला के संरक्षण एवं प्रसार में दिए गए आजीवन योगदान को समर्पित है।

भिकल्या धिंडा ने केवल दस वर्ष की आयु में ही तारपा वादन की शुरुआत की थी। यह कला उनके परिवार में लगभग चार सौ वर्षों से चली आ रही वंशानुगत परंपरा है। आठ दशकों से अधिक समय तक उन्होंने इस लोकवाद्य को केवल बजाने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके निर्माण, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक संदर्भ में प्रयोग तक को अपने जीवन का केंद्र बनाया।

तारपा, जो आदिवासी समुदाय की आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक माना जाता है, का वादन धिंडा जी देवपूजा, धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों तथा सामाजिक समारोहों में करते आए हैं। लगभग दस फुट लंबे इस वाद्य का नाद उनकी विशिष्ट पहचान बन चुका है। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में कला प्रस्तुतियाँ देकर तारपा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है तथा अनेक युवा कलाकारों को इस कला का प्रशिक्षण देकर परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाया है।

पुरस्कार की घोषणा के बाद जिलाधिकारी डॉक्टर इंदु रानी जाखड़ ने धिंडा जी से मुलाकात कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति के संरक्षण में उनका योगदान पूरे जिले के लिए गौरव का विषय है और यह सम्मान पालघर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर ले जाने वाला है।

इस सम्मान से तारपा वाद्य तथा आदिवासी लोककला को नई पहचान मिली है। जिले भर से धिंडा जी को शुभकामनाओं की बौछार हो रही है।

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Rajesh