तृप्ति प्रमाण ब्यूरो, पटना विनोद प्रसाद |
पटना हाईकोर्ट ने राजधानी समेत पूरे बिहार में बढ़ते वायु और ध्वनि प्रदूषण के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति राजीव रॉय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर प्रभावी नियंत्रण न होने को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने वर्तमान स्थिति को ‘खतरनाक’ बताते हुए कहा है कि बोर्ड अपनी कानूनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में विफल रहा है।
यह टिप्पणी सुरेंद्र प्रसाद द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए बोर्ड को अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
जागरूकता कार्यक्रम और डीजे पर कार्रवाई का निर्देश
हाईकोर्ट ने प्रदूषण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के लिए ‘रन फॉर पॉल्यूशन’ जैसे कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया है। साथ ही, डीजे और लाउडस्पीकर के नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई में हो रही ढिलाई को लेकर भी अदालत ने नाराजगी व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि अधिकारियों की उदासीनता आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ के समान है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेश रिपोर्ट में बताया गया कि मैरिज हॉलों को नोटिस जारी किए गए हैं और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए ‘ग्रीन नेट’ के उपयोग को अनिवार्य किया गया है। हालांकि, न्यायमित्र ने यह इंगित किया कि स्थानीय निकायों को भेजे गए पत्रों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
छह थाना प्रभारियों को तलब, रिपोर्ट पेश करने का आदेश
हाईकोर्ट ने पटना के कदमकुआं, पीरबहोर, आलमगंज, रूपसपुर, गांधी मैदान और बुद्ध कॉलोनी थानों के प्रभारियों को भी उनकी निष्क्रियता के लिए फटकार लगाई है। अदालत ने इन थानों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को असंतोषजनक बताते हुए सभी प्रभारियों को 19 जून 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
ध्वनि प्रदूषण के मामले में सख्ती के निर्देश
सुनवाई के दौरान राजीव नगर और छपरा सदर क्षेत्रों में भी ध्वनि प्रदूषण के गंभीर उल्लंघन की शिकायतें सामने आईं। अदालत ने संबंधित थानों को इन मामलों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि बारात या जुलूस को रोके बिना, नियम तोड़ने वालों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाए और कार्यक्रम समाप्त होने के बाद साक्ष्यों के आधार पर सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए।
ऑटो-ई-रिक्शा में तेज आवाज पर भी होगी कार्रवाई
अदालत ने ऑटो और ई-रिक्शा में तेज आवाज में संगीत बजाने के मुद्दे पर भी पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने संबंधित कानूनों के पालन की जानकारी मांगी है।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक बिना अनुमति लाउडस्पीकर का उपयोग पूर्णतः प्रतिबंधित है। इस नियम का उल्लंघन करने पर पुलिस को उपकरण जब्त करने और कानूनी कार्रवाई करने का पूर्ण अधिकार है।
अदालत ने अगली सुनवाई 19 जून 2026 को निर्धारित की है, जब तक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस को ठोस कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
पटना में बढ़ते प्रदूषण पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, प्रदूषण बोर्ड और पुलिस को फटकार |
by विनोद प्रसाद
Published On: April 12, 2026 12:50 pm
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