महाराष्ट्र सरकार की सूखा राहत योजनाओं की सराहना, किसानों को अग्रिम आर्थिक सहायता और अन्य रियायतें देने के फैसलों का किया समर्थन
ब्यूरो चीफ: नटवर झा
भाजपा वसई-विरार जिला अध्यक्ष प्रज्ञा पाटिल ने महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने सहित विभिन्न राहत उपायों के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को बधाई दी है। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से किसानों, विद्यार्थियों और ग्रामीण परिवारों के लिए घोषित सहायता योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में किसानों को राहत देना महत्वपूर्ण है।
प्रज्ञा पाटिल के बयान के अनुसार, महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने सूखे की स्थिति से निपटने के लिए पानी, फसलों और पशुओं के चारे की व्यवस्था सहित कई उपाय किए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य के 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है और दिवाली से पहले किसानों के खातों में 5,000 रुपये की अग्रिम आर्थिक सहायता जमा की गई है।
किसानों को राहत और कर्जमाफी की उम्मीद
प्रज्ञा पाटिल ने कहा कि सरकार के इस फैसले से राज्य के लगभग साढ़े तीन लाख परिवारों की कर्जमाफी का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। उन्होंने इसे किसानों के लिए बड़ी राहत बताते हुए कहा कि सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान किसानों को आर्थिक और प्रशासनिक सहयोग मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गंभीर सूखे के बीच किसानों से कर्ज वसूली करने वाली एजेंसियों को कड़ी चेतावनी दी है। उनके अनुसार, सरकार ने पेयजल की उपलब्धता और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए हैं।
विद्यार्थियों की परीक्षा फीस में छूट और चारे की व्यवस्था
प्रज्ञा पाटिल ने बताया कि सूखा प्रभावित तालुकों में विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करने का निर्णय लिया गया है। साथ ही, पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चारा फसलों की योजना बनाने की बात भी कही गई है।
उन्होंने किसानों से सूखे की चुनौती का सामना करने में सरकार का सहयोग करने की अपील की। उनके बयान के अनुसार, सरकार ने किसानों से गारंटीकृत कीमत पर चारा खरीदने का फैसला भी किया है, ताकि पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।
बिजली, आर्थिक सहायता और किसान कल्याण योजनाओं का उल्लेख
प्रज्ञा पाटिल ने कहा कि राज्य में साढ़े सात हॉर्सपावर तक के कृषि पंपों के लिए मुफ्त बिजली आपूर्ति, कर्ज वसूली से राहत और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में विद्यार्थियों को परीक्षा फीस से छूट जैसे उपाय किसानों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि राज्य सरकार ने दो लाख से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के परिवारों को 2,000 रुपये की नकद सहायता दी है। इसके अलावा, उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार की किसान कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पात्र किसान परिवारों को सालाना 12,000 रुपये की सहायता देने के लिए राज्य सरकार ने 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई है।
उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, नमो शेतकरी योजना, पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्जमुक्ति योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में राज्य की हिस्सेदारी और कृषि पंपों के बिजली बिल से संबंधित राहत उपायों का भी उल्लेख किया।
कर्नाटक की सहायता से की महाराष्ट्र की तुलना
प्रज्ञा पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से घोषित 5,000 रुपये की अग्रिम सहायता की तुलना कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की ओर से घोषित 2,500 रुपये की सहायता से की। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में घोषित राशि कर्नाटक की तुलना में दोगुनी है।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्नाटक सरकार केंद्र से सहायता मिलने का इंतजार कर रही है और वहां प्रभावित किसानों तक सहायता समय पर पहुंचने को लेकर सवाल हैं। ये तुलनात्मक दावे प्रज्ञा पाटिल के बयान पर आधारित हैं और इनके तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
सूखे के मुद्दे पर राजनीति के बजाय सहयोग की अपील
प्रज्ञा पाटिल ने सूखे को प्राकृतिक आपदा बताते हुए इस मुद्दे पर विपक्ष की राजनीति की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों को मिलकर काम करना चाहिए तथा किसानों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने लोगों से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस संकल्प का समर्थन करने की अपील की, जिसके तहत राज्य को भविष्य में सूखे की समस्या से मुक्त करने के प्रयास किए जाने की बात कही गई है।
नोट: इस खबर में सरकारी योजनाओं, सहायता राशि, सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या और कर्नाटक से तुलना संबंधी आंकड़े प्रज्ञा पाटिल के दिए गए बयान पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि के बाद ही इन्हें अंतिम सरकारी स्थिति के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
ब्यूरो चीफ: नटवर झा




