धारावी पुनर्विकास के बीच सामाजिक कार्यकर्ता के खिलाफ FIR; भालेराव का दावा—घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था, CCTV समेत अन्य सबूत होने की बात
मुंबई। धारावी पुनर्विकास और उससे जुड़े भूखंडों को लेकर जारी राजनीतिक एवं सामाजिक बहस के बीच धारावी और शाहू नगर क्षेत्र से जुड़ा एक मामला सामने आया है। गरीबों और स्थानीय निवासियों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने का दावा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
भालेराव ने अपने खिलाफ दर्ज मामले को लेकर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि जिस घटना के आधार पर उनका नाम एफआईआर में शामिल किया गया, उस समय वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। उनके मुताबिक घटना के समय वे अपने घर पर थे और उनके पास आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग सहित अन्य साक्ष्य मौजूद हैं।
“क्या गरीबों के अधिकारों की आवाज उठाना गुनाह है?”
संजय भालेराव ने सवाल उठाते हुए कहा कि “क्या गरीबों के घर, रोजगार और अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाना अब गुनाह बन गया है?”
उन्होंने कहा कि वे धारावी पुनर्विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन पुनर्विकास की प्रक्रिया में किसी पात्र नागरिक, दुकानदार, मजदूर या छोटे व्यवसायी के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।
उनका कहना है कि प्रभावित नागरिकों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लिखित जानकारी, पात्रता को लेकर स्पष्टता और कानून के मुताबिक पुनर्वास मिलना चाहिए।
मकान खाली कराने के दबाव का दावा
भालेराव ने आरोप लगाया है कि धारावी के कुछ इलाकों में लोगों पर मकान खाली करने को लेकर दबाव बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
साथ ही उन्होंने कहा कि नागरिकों को बिना किसी दबाव या भय के अपनी बात रखने का अधिकार मिलना चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग
अपने खिलाफ दर्ज मामले को लेकर भालेराव ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि जांच के दौरान CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जानी चाहिए।
उनके मुताबिक इन साक्ष्यों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि कथित घटना के समय वे वास्तव में कहां मौजूद थे।
“पुलिस और न्याय व्यवस्था पर भरोसा”
भालेराव ने कहा कि उन्हें मुंबई पुलिस और न्याय व्यवस्था पर भरोसा है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबों, मजदूरों और धारावीवासियों के संवैधानिक अधिकारों की आवाज उठाने का उनका प्रयास आगे भी जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ और गरीब नागरिकों के अधिकारों के लिए है। उनके अनुसार, यदि उनके खिलाफ कोई आरोप लगाया गया है तो उसकी जांच कानून और उपलब्ध सबूतों के आधार पर होनी चाहिए।
जांच के निष्कर्ष पर टिकी नजर
फिलहाल इस मामले में निष्पक्ष पुलिस जांच महत्वपूर्ण होगी। संजय भालेराव की ओर से लगाए गए आरोप और उनके पक्ष में बताए जा रहे साक्ष्यों की जांच के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एफआईआर में लगाए गए आरोपों की सत्यता या असत्यता का अंतिम निर्धारण जांच एजेंसी और सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
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