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वैश्वीकरण और नैतिकता: टी.पी.एस. कॉलेज में आयोजित व्याख्यान में उठी महत्वपूर्ण चर्चा |

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पटना (ब्यूरो रिपोर्ट विनोद प्रसाद ): टी.पी.एस. कॉलेज, पटना के दर्शनशास्त्र विभाग एवं भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (ICPR), भारत सरकार द्वारा प्रायोजित “वैश्वीकरण के युग में व्यावसायिक नैतिकता की चुनौतियाँ” विषय पर एक आवधिक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समकालीन सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के संदर्भ में नैतिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर विचार-विमर्श किया गया।

प्राचार्य शांडिल्य: नैतिकता विकास की दिशा निर्धारित करती है

कार्यक्रम के संरक्षक एवं प्राचार्य प्रो. तपन कुमार शांडिल्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि वैश्वीकरण के वर्तमान परिदृश्य में आर्थिक प्रगति और प्रतिस्पर्धा ने मानव जीवन में गति अवश्य प्रदान की है, किंतु इसके साथ नैतिक मूल्यों के संरक्षण की चुनौती भी उत्पन्न हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अर्थशास्त्र और नैतिकता के सैद्धांतिक पहलू केवल शैक्षणिक चर्चा तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि इन्हें व्यावहारिक जीवन में लागू करना आवश्यक है।

प्रो. शांडिल्य ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने पेशेवर जीवन में नैतिकता को आधार बनाकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें, क्योंकि समावेशी और सतत विकास के लिए यह अनिवार्य है।

विशेषज्ञों ने रखे विचार

मुख्य वक्ता प्रो. श्यामल किशोर, प्राचार्य, रामेश्वर महाविद्यालय, मुज़फ्फरपुर ने व्यावसायिक क्षेत्र में नैतिक संकट के दार्शनिक और मानवीय आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नैतिकता केवल सैद्धांतिक विचार नहीं, बल्कि जीवन-प्रयोग है, जो समाज को स्थायित्व प्रदान करती है।

आमंत्रित वक्ता प्रो. नागेंद्र मिश्र ने “वसुधैव कुटुंबकम्” की अवधारणा को वैश्विक नैतिकता के केंद्र में रखते हुए कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में संकीर्ण हितों से ऊपर उठकर समावेशी और मानवीय दृष्टिकोण अपनाना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन एवं उपस्थिति

कार्यक्रम के संयोजक प्रो. विजय कुमार सिन्हा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। मंच संचालन डॉ. दीपिका द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मुकुंद कुमार ने प्रस्तुत किया।

यह व्याख्यान स्वर्गीय मनीष चौधरी की स्मृति को समर्पित रहा। उपस्थित जनसमूह ने उनके शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में प्रो. रूपम, प्रो. अंजलि प्रसाद, प्रो. उषा किरण, डॉ. प्रशांत कुमार, डॉ. रवि प्रभाकर, डॉ. तरन्नुम, डॉ. सोनू प्रताप, डॉ. चंद्रशेखर, डॉ. नूतन अंशुमान, डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. ओंकार सहित अनेक प्राध्यापकगण एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। छात्र-छात्राओं में अवनीत भूषण, चांदनी, पूजा सहित कई विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की।

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Rajesh