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वसई-विरार बाढ़ संकट: विपक्ष की तीखी घेराबंदी, मनोज पाटिल ने 2018 से अब तक नाला सफाई और आपदा प्रबंधन के खर्च का मांगा हिसाब |

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विरार:

वसई-विरार शहर में हाल ही में (4 से 8 जुलाई के बीच) हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया था। शहर के कई इलाकों में आई भीषण बाढ़ की स्थिति को लेकर अब सियासत पूरी तरह गरमा गई है। वसई-विरार महानगरपालिका (वीवीएमसी) में विपक्ष के नेता मनोज पाटिल ने इस गंभीर आपदा पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने महापौर अजीव पाटिल को एक आधिकारिक पत्र लिखकर इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तुरंत ‘विशेष महासभा’ (Special General Body Meeting) बुलाने की पुरजोर वकालत की है। पाटिल का कहना है कि शहर को हर साल डूबने से बचाने के लिए एक ठोस और स्थायी कार्ययोजना पर चर्चा होना बेहद जरूरी है।

महानगरपालिका अधिनियम का हवाला, खर्चों का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग

मनोज पाटिल ने महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 के कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि जनहित के इस संवेदनशील मुद्दे पर विशेष महासभा बुलाई जानी चाहिए। इस सभा में बाढ़ से हुए नुकसान, मानसून से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों और भविष्य की ठोस रणनीति पर विस्तृत बहस होनी चाहिए। उन्होंने सीधे शब्दों में मांग की है कि साल 2018 से लेकर अब तक शहर में जलनिकासी (ड्रेनेज सिस्टम), बड़े और छोटे नालों की सफाई, आपदा प्रबंधन (डिजास्टर मैनेजमेंट) और बाढ़ नियंत्रण के नाम पर जितने भी करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, उसका पूरा श्वेत-पत्र और ब्यौरा सदन के पटल पर रखा जाए।

IIT और NEERI के तकनीकी सुझावों का क्या हुआ?

विपक्ष के नेता ने मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2018 में राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) और आईआईटी (IIT) जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं ने वसई-विरार को बाढ़ मुक्त बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव दिए थे। महानगरपालिका ने पिछले आठ सालों में उन सुझावों पर धरातल पर क्या कार्रवाई की, कौन से प्रोजेक्ट्स पूरे किए और उन पर कितना बजट खर्च हुआ, इसकी पूरी जानकारी भी जनता के सामने सार्वजनिक की जानी चाहिए।

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

मनोज पाटिल ने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया है कि टैक्स देने वाले आम नागरिकों के जान-माल की सुरक्षा मनपा की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भविष्य में मानसून के दौरान ऐसी डरावनी बाढ़ की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए प्रशासन को एक समयबद्ध (टाइम-बाउंड) एक्शन प्लान पेश करना होगा। उन्होंने महापौर से अपील की है कि वे आम जनता की भावनाओं और परेशानियों को समझते हुए बिना किसी देरी के जल्द से जल्द विशेष महासभा का आयोजन सुनिश्चित करें।

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Rajesh