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गौशाला कार्रवाई के विरोध में मोर्चा: आयुक्त की तस्वीर पर कालिख और मनपा मुख्यालय पर गोबर फेंकने पर कार्रवाई नहीं, उठ रहे सवाल |

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विरार। वसई-विरार महानगरपालिका द्वारा नालासोपारा पश्चिम स्थित शनि मंदिर परिसर के पास संचालित गौशाला के खिलाफ की गई कार्रवाई के बाद शहर का राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। इस कार्रवाई के विरोध में भारतीय जनता पार्टी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने 8 जून को नालासोपारा से महानगरपालिका मुख्यालय तक एक विशाल मोर्चा निकाला। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई विवादास्पद घटनाएं

मोर्चे के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने महानगरपालिका आयुक्त की तस्वीर पर कालिख पोत दी और मनपा मुख्यालय परिसर में गोबर फेंक दिया। इन घटनाओं के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए, जिसके बाद पूरे शहर में इसकी चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासन या पुलिस की ओर से किसी भी प्रकार की कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।

दोहरे मापदंड के आरोप

इसी मुद्दे को लेकर नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकार संगठनों के बीच सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि किसी सरकारी अधिकारी की तस्वीर का सार्वजनिक रूप से अपमान करना और सरकारी परिसर में इस प्रकार का प्रदर्न गंभीर मामला है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना कई शंकाओं को जन्म दे रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ समय पहले महानगरपालिका के स्थापना विभाग से संबंधित एक समाचार प्रकाशित होने पर संबंधित पत्रकार के खिलाफ अज्ञात रिपोर्ट दर्ज की गई थी। ऐसे में विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं पर कार्रवाई न होने से दोहरे मापदंड अपनाए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि समाचार प्रकाशन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, तो सार्वजनिक रूप से हुए इस कृत्य पर भी समान रूप से कानून लागू होना चाहिए।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस संबंध में महानगरपालिका का पक्ष जानने के लिए आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी. और अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाड़े से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक दोनों अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका। प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल शहरवासियों की नजर इस बात पर टिकी है कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है और कानून के समक्ष समानता का सिद्धांत कितना प्रभावी साबित होता है। जांच जारी है।

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Rajesh