डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी: भुने हुए गेहूं के संभावित स्वास्थ्य लाभ

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फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर गेहूं को भूनकर खाने के तरीके, फायदे और जरूरी सावधानियां

आगरा। भारतीय खान-पान में गेहूं का लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इसे विभिन्न रूपों में भोजन का हिस्सा बनाया जाता है। डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी, के अनुसार गेहूं को भूनकर उसका उपयोग सत्तू, दलिया या अन्य पारंपरिक खाद्य पदार्थों के रूप में किया जा सकता है। हालांकि, इसके स्वास्थ्य लाभ व्यक्ति की संपूर्ण डाइट, मात्रा और स्वास्थ्य स्थिति पर भी निर्भर करते हैं।

साबुत गेहूं में आहार फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन और कई खनिज पाए जाते हैं। शोध में साबुत अनाज के नियमित सेवन को हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम में कमी तथा वजन प्रबंधन जैसे बेहतर स्वास्थ्य परिणामों से जोड़ा गया है।

पाचन के लिए फाइबर महत्वपूर्ण

भुने हुए गेहूं से तैयार सत्तू या दलिया आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाने का एक तरीका हो सकता है। फाइबर आंतों के सामान्य कार्य और मल त्याग को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। पर्याप्त पानी के साथ संतुलित मात्रा में फाइबर का सेवन कब्ज की समस्या से बचाव में सहायक हो सकता है।

हालांकि, अचानक बहुत अधिक फाइबर लेने से कुछ लोगों को गैस, पेट फूलना या असहजता हो सकती है। इसलिए मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाना उचित रहता है।

वजन प्रबंधन में हो सकता है सहायक

साबुत अनाज में मौजूद फाइबर लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में योगदान दे सकता है। इसी वजह से संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर गेहूं जैसे साबुत अनाज वजन प्रबंधन में उपयोगी हो सकते हैं।

यदि भुने हुए गेहूं को बिना अतिरिक्त तेल, घी या अधिक चीनी के सेवन किया जाए, तो यह कई प्रोसेस्ड स्नैक्स की तुलना में एक पौष्टिक विकल्प हो सकता है। हालांकि, इसे वजन घटाने वाला “सुपरफूड” या शरीर की अतिरिक्त चर्बी सीधे जलाने वाला खाद्य पदार्थ कहना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा।

ऊर्जा और पोषण का स्रोत

गेहूं मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट प्रदान करता है, इसलिए यह शरीर को ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल है। साबुत गेहूं में फाइबर के साथ विटामिन और खनिज भी पाए जाते हैं।

सत्तू या भुने गेहूं को नाश्ते में शामिल किया जा सकता है, लेकिन इसे संतुलित भोजन का विकल्प मानने के बजाय अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ लेना बेहतर है।

मधुमेह में सावधानी जरूरी

साबुत अनाज को संतुलित आहार का हिस्सा बनाने से टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम पर सकारात्मक प्रभाव से जुड़े प्रमाण उपलब्ध हैं।

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भुना हुआ गेहूं मधुमेह का इलाज करता है या हर डायबिटीज मरीज के लिए समान रूप से उपयुक्त है। मात्रा, भोजन के साथ लिए जाने वाले अन्य कार्बोहाइड्रेट और व्यक्ति की दवाओं एवं ब्लड शुगर के स्तर को ध्यान में रखना जरूरी है।

हृदय स्वास्थ्य के लिए साबुत अनाज का महत्व

साबुत अनाज के सेवन और हृदय रोग के कम जोखिम के बीच संबंध को कई अध्ययनों और मेटा-विश्लेषणों में देखा गया है। इनमें फाइबर सहित साबुत अनाज के विभिन्न पोषक घटकों की भूमिका बताई गई है।

इसलिए भुना हुआ साबुत गेहूं संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे हृदय रोग की रोकथाम या उपचार का अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।

भुने गेहूं का सेवन कैसे करें?

1. भुना गेहूं:
गेहूं के दानों को बिना तेल या घी के भूनकर सीमित मात्रा में नाश्ते के रूप में लिया जा सकता है।

2. गेहूं का सत्तू:
भुने हुए गेहूं को पीसकर तैयार पाउडर को पानी के साथ लिया जा सकता है। स्वाद के लिए नींबू और सीमित मात्रा में नमक मिलाया जा सकता है।

3. भुना गेहूं दलिया:
भुने हुए गेहूं या गेहूं के दलिये को सब्जियों के साथ पकाकर पौष्टिक भोजन तैयार किया जा सकता है।

4. सत्तू से बने व्यंजन:
भुने गेहूं के आटे में सीमित मात्रा में गुड़ और मेवे मिलाकर लड्डू या पंजीरी तैयार की जा सकती है। इसमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

गेहूं में ग्लूटेन पाया जाता है। सीलिएक रोग से पीड़ित लोगों को गेहूं और ग्लूटेन युक्त खाद्य पदार्थों से पूरी तरह बचना पड़ता है।

इसके अलावा, जिन्हें गेहूं से एलर्जी या अन्य संवेदनशीलता है, उन्हें इसके सेवन से पहले चिकित्सक या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

अत्यधिक मात्रा में फाइबर लेने से गैस या पेट फूलने जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए किसी भी खाद्य पदार्थ की तरह भुने गेहूं का सेवन भी संतुलित मात्रा में करना बेहतर है।

डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी के अनुसार, पारंपरिक खाद्य पदार्थों को संतुलित और विविध आहार का हिस्सा बनाकर लिया जा सकता है। किसी बीमारी की स्थिति में केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह और समग्र आहार पर ध्यान देना जरूरी है।

स्रोत/विशेषज्ञ: डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी, आगरा

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