शाहू नगर पुलिस के अपराध मामले में सत्र न्यायालय का आदेश; गवाहों को प्रभावित करने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका पर अदालत ने जताई चिंता
रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत
मुंबई। शाहू नगर पुलिस थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 464/2026 के आरोपी मुरुगनंथम अभिमन्यु (48) की अग्रिम जमानत याचिका बृहन्मुंबई सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी है। न्यायालय कक्ष क्रमांक 34 के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. के. उपाध्याय ने 29 सितंबर 2026 को अग्रिम जमानत याचिका क्रमांक 1740/2026 पर यह आदेश पारित किया।
मामले में सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव स्वयं अदालत में उपस्थित हुए और आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया।
बैठक के दौरान मारपीट का आरोप
न्यायालयीन आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार, 6 सितंबर 2026 को शाम करीब 6:30 बजे आझाद नगर परिसर में तोड़क कार्रवाई की पृष्ठभूमि में स्थानीय निवासियों की बैठक चल रही थी। स्थानीय निवासियों की मांग थी कि गणेश उत्सव के दौरान साईबाबा मंदिर में गणपति के आगमन को देखते हुए मंदिर को फिलहाल न तोड़ा जाए।
शिकायत के अनुसार, इसी दौरान आरोपी और उसके साथ आए अन्य लोगों के साथ विवाद हुआ और मारपीट की घटना सामने आई। FIR में एक आरोपी द्वारा लोहे की रॉड के इस्तेमाल का भी आरोप दर्ज है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत शाहू नगर पुलिस थाने में अपराध दर्ज किया गया है।
घर खाली कराने के दबाव का आरोप
अदालत के समक्ष संजय रमेश भालेराव ने दावा किया कि धारावी पुनर्विकास की पृष्ठभूमि में संबंधित परिसर के निवासियों के बीच भय और दबाव का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी मुरुगनंथम अभिमन्यु अदानी नवभारत मेगा डेवलपर से संबंधित कार्य के लिए परिसर में सक्रिय था और कुछ स्थानीय निवासियों द्वारा घर खाली कराने के लिए दबाव एवं धमकी की शिकायतें की जा रही थीं।
हालांकि, यह आरोप भालेराव की ओर से अदालत में रखे गए पक्ष का हिस्सा है। उपलब्ध न्यायालयीन विवरण में इन आरोपों के संबंध में कोई स्वतंत्र प्रशासनिक या न्यायालयीन निष्कर्ष दर्ज होने की जानकारी नहीं है।
भालेराव ने यह भी कहा कि पुनर्विकास का विरोध करने अथवा अपने अधिकारों की मांग करने वाले निवासियों को धमकाए जाने की शिकायतें उनके संज्ञान में आई थीं। इसी आधार पर उन्होंने आशंका जताई कि आरोपी को अग्रिम जमानत मिलने पर वह दोबारा परिसर में जाकर गवाहों या स्थानीय निवासियों पर दबाव डाल सकता है।
भालेराव ने खुद को मामले में फंसाने का आरोप लगाया
संजय भालेराव ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि घटना से प्रत्यक्ष संबंध नहीं होने के बावजूद उनका नाम मामले में घसीटने का प्रयास किया गया। उनके अनुसार, उन्होंने अपनी भूमिका से संबंधित उपलब्ध साक्ष्य और परिस्थितियां जांच एजेंसी के सामने रखी हैं।
उन्होंने अदालत का ध्यान आरोपी के पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की ओर भी आकर्षित किया।
आरोपी के खिलाफ नौ पूर्व रिकॉर्ड का उल्लेख
आदेश में दर्ज जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसी ने आरोपी के खिलाफ पहले से नौ आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात अदालत के समक्ष रखी। भालेराव ने भी धारावी और शाहू नगर पुलिस थानों की सीमा में अलग-अलग वर्षों में दर्ज मामलों का उल्लेख किया।
धारावी पुलिस थाना
- अपराध क्र. 528/1997 — धारा 324, 34 भा.दं.सं.
- अपराध क्र. 363/1999 — धारा 387, 34 भा.दं.सं.
- अपराध क्र. 490/2000 — धारा 326, 34 भा.दं.सं.
- अपराध क्र. 60/2003 — धारा 324, 323 भा.दं.सं.
शाहू नगर पुलिस थाना
- अपराध क्र. 31/2004 — धारा 324, 506(2) भा.दं.सं.
- अपराध क्र. 153/2004 — धारा 324, 323, 506(2) भा.दं.सं.
- वि.स्था.ख. क्र. 357/2005 — धारा 142 महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम
- अपराध क्र. 138/2007 — विभिन्न धाराओं के तहत मामला
- अपराध क्र. 464/2026 — BNS की संबंधित धाराओं के तहत वर्तमान मामला
इन पूर्व मामलों का उल्लेख न्यायालय के समक्ष आरोपी की पृष्ठभूमि के संदर्भ में किया गया था। किसी पूर्व मामले में अंतिम दोषसिद्धि का निष्कर्ष इस रिपोर्ट से नहीं निकाला जा रहा है।
राज्य सरकार ने भी अग्रिम जमानत का विरोध किया
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी अभियोजक श्रीमती ज्योती सावंत ने अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया। सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी इस मामले का मुख्य आरोपी है और आरोपी, शिकायतकर्ता तथा अन्य संबंधित व्यक्ति एक ही परिसर में रहते हैं।
सरकारी पक्ष ने आशंका जताई कि आरोपी को अग्रिम जमानत मिलने पर गवाहों पर दबाव डालने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, अपराध में इस्तेमाल किए जाने का आरोपित हथियार अभी बरामद किया जाना बाकी होने की बात भी अदालत के सामने रखी गई और आरोपी से हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता बताई गई।
अदालत ने इन बिंदुओं को माना महत्वपूर्ण
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में प्रथम दृष्टया उपलब्ध सामग्री पर विचार किया। न्यायालय के अनुसार—
- आरोपी का नाम FIR में दर्ज है।
- FIR में आरोपी की कथित भूमिका का उल्लेख है।
- जांच के दौरान प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने आरोपी की उपस्थिति बताई है।
- कथित हथियार की बरामदगी अभी बाकी है।
- आरोपी, शिकायतकर्ता और घायल व्यक्ति एक ही परिसर में रहते हैं।
- गवाहों को प्रभावित करने अथवा साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका पर विचार किया गया।
- आरोपी के खिलाफ पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।
- मामले की आगे गहन जांच आवश्यक है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
अग्रिम जमानत याचिका खारिज
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. के. उपाध्याय ने 29 सितंबर 2026 को अग्रिम जमानत याचिका क्रमांक 1740/2026 खारिज कर दी।
अदालत द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किया जाना आरोपी की दोषसिद्धि नहीं है। मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी तथा आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय द्वारा किया जाएगा।
“धारावीकरों के अधिकारों से समझौता नहीं”—संजय भालेराव
अदालत के आदेश के बाद संजय रमेश भालेराव ने कहा कि धारावी पुनर्विकास की प्रक्रिया में नागरिकों के कानूनी अधिकार, सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि यदि किसी निवासी से घर खाली कराने के लिए धमकी, दबाव या जबरदस्ती की शिकायत सामने आती है तो प्रशासन और पुलिस उसकी निष्पक्ष जांच करें।
भालेराव ने कहा कि पुनर्विकास को लेकर उनका पक्ष नागरिकों के अधिकार, सुरक्षित पुनर्वास, कानूनी प्रक्रिया और सम्मानजनक जीवन से जुड़ा है। उन्होंने यह भी मांग की कि धारावी पुनर्विकास जैसे बड़े प्रकल्प में पुनर्वास से जुड़ी प्रक्रिया पारदर्शी, कानूनी और दबावमुक्त हो तथा निवासियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए।




