मुंबई। दक्षिण मुंबई के ऐतिहासिक बाणगंगा टैंक में बड़ी संख्या में मछलियों के मृत पाए जाने से इलाके में चिंता का माहौल है। मछलियों की मौत के बाद जलाशय के पानी की गुणवत्ता और संभावित प्रदूषण को लेकर स्थानीय निवासियों तथा पर्यावरण प्रेमियों ने सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बाणगंगा टैंक में अचानक बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की घटना सामने आई। इसके बाद जलाशय के पानी की स्थिति को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि मछलियों की मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए पानी की वैज्ञानिक जांच और आवश्यक परीक्षण कराया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जांच के बाद ही पानी की गुणवत्ता और मछलियों की मौत के कारणों को लेकर स्पष्ट स्थिति सामने आ सकेगी।
वहीं, कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि पितृपक्ष के दौरान बड़े पैमाने पर किए गए पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठानों के कारण जलाशय में प्रदूषण बढ़ा हो सकता है। हालांकि, मछलियों की मौत के पीछे यही कारण है, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बाणगंगा टैंक दक्षिण मुंबई का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक जलस्रोत माना जाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में मछलियों की मौत ने इसके संरक्षण और जल गुणवत्ता की निगरानी को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मामले की तत्काल जांच, पानी की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कराने और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।
फिलहाल मछलियों की मौत के वास्तविक कारण का पता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण




