प्रादेशिक मनोरोग अस्पताल, ठाणे में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह उत्साहपूर्वक संपन्न |

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‘व्यक्त की गई पीड़ा को सुनें’ की अवधारणा के साथ जनजागरूकता पर जोर

ठाणे: ‘व्यक्त की गई पीड़ा को सुनें : वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव’ विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 की केंद्रीय थीम के अनुरूप प्रादेशिक मनोरोग अस्पताल, ठाणे में विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। सप्ताह के दौरान मानसिक बीमारी का प्रत्यक्ष सामना कर चुके लोगों के संघर्ष, पुनर्वास और अनुभवों को समाज संवेदनशीलता से समझने तथा उनकी आवाज को स्वास्थ्य सेवाओं के केंद्र में स्थान देने के उद्देश्य पर जोर दिया गया।

सप्ताह के दौरान अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में विशेष पोस्टर प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें मानसिक बीमारियों से जुड़े भ्रम दूर करने, समय पर उपचार के महत्व, पुनर्वास की प्रक्रिया और मानसिक बीमारी से उबर रहे लोगों को समाज में स्वीकार करने से संबंधित संदेशपरक पोस्टर प्रदर्शित किए गए। मरीजों, उनके परिजनों और नागरिकों ने प्रदर्शनी को अच्छा प्रतिसाद दिया।

व्यवसायोपचार विभाग में उचित उपचार के माध्यम से मानसिक बीमारी से उबरकर आत्मविश्वास के साथ सामान्य जीवन जी रहे मरीजों की प्रेरणादायक यात्राओं पर आधारित फिल्में दिखाई गईं। इस अवसर पर ऐसी सफलता की कहानियां लिखने वाले मरीजों और उनके परिजनों का विशेष सम्मान भी किया गया।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक बीमारी से उबरना संभव है और उचित उपचार तथा सहयोग मिलने पर व्यक्ति दोबारा खुशहाल और सामान्य जीवन की ओर लौट सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ठाणे के उपसंचालक डॉ. कैलास पवार ने की। उनके हाथों विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की मुख्य थीम का अनावरण किया गया।

डॉ. पवार ने बताया कि ठाणे, पालघर और रायगढ़ जिलों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लगातार जनजागरूकता शिविर, ओपीडी सेवाएं और रैलियां आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रादेशिक मनोरोग अस्पताल, ठाणे महाराष्ट्र के कई जिलों के लिए महत्वपूर्ण सेवा केंद्र है और भविष्य में इन सेवाओं को अधिक व्यापक, सुलभ और सक्षम बनाने के लिए सरकार प्रयासरत है।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नेताजी मुळीक ने अस्पताल के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मरीजों को केवल मरीज के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह स्नेह, सम्मान और संवेदनशीलता के साथ देखना जरूरी है।

उन्होंने बताया कि इसी आत्मीय वातावरण के कारण अनेक मरीज उपचार पूरा करने के बाद आत्मविश्वास के साथ मुख्यधारा में लौट रहे हैं।

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