शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन को लेकर महासंघ की अपील, पदाधिकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों की समस्याओं के समाधान पर दिया जोर
जौनपुर | संवाददाता: शम्भू विश्वकर्मा
जौनपुर। विधान परिषद के आगामी शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मतदाताओं से शिक्षा और शिक्षकों के हित में काम करने वाले प्रत्याशियों को ही मतदान करने की अपील की है। महासंघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. दीनानाथ सिंह, पूर्व संयुक्त महामंत्री डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित और प्रदेश प्रभारी प्रो. राघवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने संयुक्त बयान जारी कर मतदाताओं से विवेकपूर्ण निर्णय लेने का आग्रह किया।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने वालों को दें प्राथमिकता
महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालय स्तर तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करने वाले प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने प्राथमिक शिक्षकों की पदोन्नति एवं स्थानांतरण, टीईटी से संबंधित समस्याओं और शिक्षामित्रों की मांगों का समाधान करने पर जोर दिया।
माध्यमिक शिक्षकों की मांगों को उठाया
पदाधिकारियों ने माध्यमिक शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न मांगों का भी उल्लेख किया। इनमें कार्यवाहक प्रधानाचार्य के पद पर कार्यरत शिक्षकों को प्रधानाचार्य के समान वेतन, शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, ग्रेच्युटी का लाभ देने और रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने की मांग शामिल है।
उच्च शिक्षा और बेरोजगार स्नातकों के मुद्दे भी उठाए
महासंघ ने स्ववित्तपोषित शिक्षकों के विनियमन की मांग भी उठाई। इसके साथ ही अतिथि प्रवक्ताओं को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमानुसार 50 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय देने तथा बेरोजगार स्नातकों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह भत्ता देने की मांग की गई।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने मतदाताओं से अपील की कि वे विधान परिषद के आगामी शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन में प्रत्याशियों के कार्यों, शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और शिक्षकों के हित में उनकी भूमिका को ध्यान में रखकर मतदान करें।
संवाददाता: शम्भू विश्वकर्मा




