नई दिल्ली, 30 जुलाई 2025:
लोकसभा में बुधवार को जवाहर नवोदय विद्यालयों (JNV) के छात्र-खिलाड़ियों के लिए खेल कोटे में समान अवसर की मांग जोरों पर रही। सांसद डॉ. हेमंत विष्णु सवरा ने नियम 377 के तहत एक गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री योजना के तहत संचालित नवोदय विद्यालयों के छात्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों में उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन राज्य और केंद्र सरकार की नौकरी प्रक्रियाओं में उन्हें खेल प्रमाणपत्रों के लिए मान्यता न मिलने के कारण भारी अन्याय का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ. सवरा ने बताया कि नवोदय विद्यालय समिति (NVS) द्वारा जारी खेल प्रमाणपत्रों को कई राज्यों में आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं माना जाता। इसके कारण उन छात्रों को जो एसजीएफआई (स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) या अन्य राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतते हैं, वे सरकारी नौकरियों के खेल कोटे में लाभ नहीं उठा पाते।
सांसद ने की ये मांगें
अपनी बात रखते हुए डॉ. हेमंत सवरा ने केंद्र सरकार से निम्नलिखित मांगें कीं:
नवोदय विद्यालयों के छात्रों को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त खेल प्रमाणपत्रों को सभी राज्यों और केंद्रीय संस्थाओं द्वारा मान्यता प्रदान की जाए।
केंद्र एवं राज्य सरकारों की नौकरियों में खेल कोटे के तहत नवोदय विद्यालयों के खिलाड़ियों को समान अवसर सुनिश्चित किए जाएं।
इस संबंध में एक समन्वित राष्ट्रीय नीति या मार्गदर्शक सिद्धांत तैयार किए जाएं ताकि सभी राज्यों में एकरूपता बनी रहे।
कुछ राज्यों ने लिया कदम, बाकी पीछे
सांसद ने बताया कि गुजरात और राजस्थान जैसे कुछ राज्यों ने पहले ही नवोदय विद्यालयों के खेल प्रमाणपत्रों को मान्यता दे दी है। उन्होंने अन्य राज्य सरकारों से भी इस व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू करने की अपील की।
ग्रामीण प्रतिभा के लिए बड़ा कदम
डॉ. सवरा ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा केवल नवोदय विद्यालयों तक सीमित नहीं है। इसका सीधा लाभ ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को मिलेगा, जो अक्सर संसाधनों की कमी के बावजूद उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। उनका कहना था कि इस पहल से “खेलो इंडिया” अभियान को भी मजबूती मिलेगी और खेल के माध्यम से सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा।
“नवोदय विद्यालयों के छात्रों ने देश के मैदानों में अपनी प्रतिभा के झंडे गाड़े हैं। अब समय आ गया है कि सरकार उन्हें रोजगार के अवसरों में भी न्याय दे।” – डॉ. हेमंत विष्णु सवरा, सांसद
सरकार से अब जवाब की प्रतीक्षा
अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या स्थिति स्पष्ट करती है। यदि सरकार इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाती है, तो देश भर के हजारों नवोदय छात्र-खिलाड़ियों के लिए रोजगार के नए द्वार खुल सकते हैं।