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अभ्यंग: दवाई से बेहतर प्राकृतिक उपचार – डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी विशेषज्ञ”|

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आगरा, 11 दिसंबर 2025:
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग दर्द होते ही तुरंत पेनकिलर का सहारा ले लेते हैं। हालांकि, वास्तविक समाधान दर्द की जड़ को समझने में है। डॉ. मीना अग्रवाल, प्रसिद्ध नेचुरोपैथी विशेषज्ञ, का मानना है कि अभ्यंग (तेल मालिश) दर्द का न केवल त्वरित निवारण करता है, बल्कि उसकी जड़ को भी स्थायी रूप से ठीक करता है।

डॉ. अग्रवाल बताती हैं कि आयुर्वेद और नेचुरोपैथी के अनुसार, दर्द का मूल कारण वात दोष का बढ़ना है, जो जोड़ों में सूखापन, नसों का खिंचाव और रक्तसंचार में अवरोध पैदा करता है। अभ्यंग तीन स्तरों पर काम करता है –

त्वचा के माध्यम से वात को शांत करता है,
नसों में गर्माहट उत्पन्न करता है,
रक्त प्रवाह में सुधार कर सूजन कम करता है।
शोधों के मुताबिक, तेल मालिश से 60% तक दर्द तुरंत कम हो जाता है, रक्त संचार 30-40% बढ़ता है और गठिया से जुड़ी जकड़न में 50% तक आराम मिलता है। साथ ही यह नींद और मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाता है।

दवाओं के विपरीत, अभ्यंग का कोई दुष्प्रभाव नहीं है। यह केवल लक्षणों को दबाता नहीं, बल्कि शरीर की स्वाभाविक चिकित्सा प्रणाली को सक्रिय करता है। डॉ. अग्रवाल बताती हैं कि यह सूजन कम करने, नसों को मजबूत करने और जोड़ों को प्राकृतिक चिकनाई प्रदान करने में अत्यंत प्रभावी है।

उन्होंने विभिन्न प्रकार के दर्द के लिए विशिष्ट तेलों की सिफारिश की:

महानारायण तेल – सर्वाइकल, पीठ दर्द, नसों की कमजोरी
धन्वंतरम तेल – जोड़ों की सूजन, थकान
बैंगन तेल – तीव्र दर्द व चोट के बाद
तिल का तेल – वात शांति और संधि दर्द
पीनस तेल – सायटिका और स्लिप डिस्क
अभ्यंग का सही तरीका भी महत्वपूर्ण है: तेल को गुनगुना करें, दर्द वाले हिस्से पर 5-7 मिनट मालिश करें, 15 मिनट आराम करें और गुनगुना पानी पिएं।

डॉ. मीना अग्रवाल का संदेश स्पष्ट है – “स्वास्थ्य ही सच्चा धन है, और अभ्यंग इस धन को संजोने का प्राकृतिक मार्ग है।”

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Rajesh