📍 डेटलाइन:
आगरा, 8 जनवरी 2026
📌 लीड पैराग्राफ:
सर्दियों के मौसम में जैकेट और दस्ताने पहनना तो सभी याद रखते हैं, लेकिन कानों की सुरक्षा अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती है। डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी विशेषज्ञ और स्वास्थ्य संवाददाता आगरा, ने चेतावनी दी है कि कान केवल श्रवणेंद्रिय नहीं, बल्कि शरीर के तापमान नियंत्रण की सबसे कमजोर कड़ी हैं—और इनकी अनदेखी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।
📖 विस्तृत रिपोर्ट:
डॉ. अग्रवाल के अनुसार, कानों में वसा या मांसपेशियों की कोई सुरक्षात्मक परत नहीं होती। ठंडी हवा सीधे कान की त्वचा और नलिका से टकराकर शरीर के कोर तापमान को तेजी से कम कर सकती है, जिससे थर्मल शॉक का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि कानों के पीछे स्थित वेगस नर्व के उत्तेजित होने से चक्कर आना, सिरदर्द या बेल्स पॉल्सी जैसी स्थिति हो सकती है। साथ ही, आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों मानते हैं कि कानों से ठंड लगने से पाचन तंत्र, रक्तचाप और प्रतिरक्षा प्रणाली प्रभावित होती है।
“ठंड में कानों का वैक्स सख्त हो जाता है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ता है। यहाँ तक कि दांतों का दर्द भी कई बार कान की नसों के कारण होता है,” उन्होंने स्पष्ट किया।
✅ सुरक्षा सुझाव:
मफलर या मंकी कैप से कान पूरी तरह ढकें
तेज हवा में कानों में हल्की रुई लगाएं
बादाम या तिल के तेल की एक बूंद कान के बाहरी हिस्से पर लगाएं
डॉ. अग्रवाल ने कहा, “आपके कान शरीर की खिड़कियां हैं। अगर इनसे ठंड अंदर आएगी, तो पूरे शरीर का तापमान बिगड़ सकता है।”
📌 निष्कर्ष:
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में कानों की देखभाल न केवल सुनने की क्षमता बल्कि समग्र स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक है। डॉ. मीना अग्रवाल ने जनता से अपील की है कि वे स्टाइल के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें।