पटना। बिहार की राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा राज्यसभा सदस्य पद के लिए नामांकन दाखिल करने की पुष्टि के बाद पूर्णिया से निर्वाचित सांसद पप्पू यादव ने गैर-भाजपा राजनीतिक दलों से अनुरोध किया है कि निशांत कुमार को बिहार का अगला मुख्यमंत्री नियुक्त किया जाए। पप्पू यादव का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में यदि उचित निर्णय नहीं लिया गया तो राज्य की राजनीतिक दिशा केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के अनुकूल हो सकती है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने स्वयं राज्यसभा चुनाव हेतु नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। नामांकन प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात पूर्व में प्रचलित सभी अनुमानों पर विराम लग गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी नामांकन कार्यक्रम में उपस्थित रहे। आज नीतीश कुमार के अतिरिक्त नितिन नवीन, उपेंद्र कुशवाहा, शिवेश कुमार राम एवं रामनाथ ठाकुर ने भी राज्यसभा सदस्यता हेतु नामांकन दाखिल किए।
इस राजनीतिक विकास के पश्चात यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से मुक्त हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता को मुख्यमंत्री पद सौंपे जाने की चर्चा प्रचलित है। इसके साथ ही, दो उपमुख्यमंत्री पद जेडीयू को आवंटित किए जाने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। जेडीयू नेता एवं नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री पद पर नियुक्त किए जाने की संभावना राजनीतिक वृत्तों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
बिहार की परिवर्तनशील राजनीतिक परिस्थितियों के मध्य पूर्णिया से निर्वाचित सांसद पप्पू यादव ने सामाजिक संचार माध्यम फेसबुक के माध्यम से अपनी राख प्रस्तुत की है। उन्होंने अपने संदेश में उल्लेख किया है कि नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद छोड़ने की स्थिति में बिहार को किसी एक दल का प्रभाव क्षेत्र नहीं बनने देना चाहिए। पप्पू यादव ने मांझी, चिराग पासवान, लालू प्रसाद यादव एवं उपेंद्र कुशवाहा जैसे क्षेत्रीय नेताओं से आग्रह किया है कि वे सर्वसम्मति से निशांत कुमार को निःशर्त समर्थन प्रदान करें एवं उन्हें बिहार का मुख्यमंत्री बनाने में सहयोग करें। उनका मत है कि इस निर्णय से केंद्र की सत्ताधारी पार्टी के लिए राज्य में राजनीतिक विस्तार सीमित हो जाएगा। भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था पर दलों के मध्य आपसी वार्ता द्वारा निर्णय लिया जा सकता है। इस ऐतिहासिक निर्णय से नेता राज्य की राजनीति में विशेष स्थान प्राप्त कर सकते हैं एवं बिहार की स्वाभिमान की भावना को सुदृढ़ कर सकते हैं।
पुलिस प्रशासन एवं चुनाव आयोग के अनुसार, सभी प्रक्रियाएं विधि सम्मत रूप से संपन्न हो रही हैं। स्थिति पर निरंतर निगरानी बनाई हुई है।