आगरा। सोरायसिस एक ऑटोइम्यून स्किन कंडीशन है, जो घुटनों, कोहनियों और स्कैल्प सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों की त्वचा को प्रभावित करती है। इस बीमारी में त्वचा लाल, सूखी, पपड़ीदार और खुजलीदार हो जाती है। चूंकि यह एक क्रोनिक बीमारी है, इसलिए मरीजों को दैनिक जीवन में सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। ऐसे में एक आम सवाल यह उठता है कि क्या सोरायसिस के मरीजों के लिए सूरज की धूप फायदेमंद है या हानिकारक?
इस विषय पर आगरा स्थित नेचुरोपैथी विशेषज्ञ मीना अग्रवाल और राजौरी गार्डन, दिल्ली की कॉस्मेटोलॉजिस्ट व त्वचा रोग विशेषज्ञों की राय के आधार पर प्रस्तुत है यह विस्तृत जानकारी।
सोरायसिस क्या है?
सोरायसिस एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, जिसमें त्वचा की कोशिकाएं सामान्य गति से कहीं अधिक तेजी से बढ़ने लगती हैं। इसकी वजह से त्वचा पर मोटी, सफेद-चांदी जैसी पपड़ियां बन जाती हैं, जिनमें जलन और खुजली होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी प्रतिरक्षा प्रणाली की गलत प्रतिक्रिया के कारण होती है, जहां शरीर की इम्यून सेल्स गलती से स्वस्थ त्वचा कोशिकाओं पर हमला कर देती हैं।
धूप: सोरायसिस में सहायक या बाधक?
नेचुरोपैथी विशेषज्ञ मीना अग्रवाल के अनुसार, सोरायसिस के मरीजों के लिए सीमित और सही समय पर धूप लेना फायदेमंद हो सकता है। सूरज की अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणें, विशेष रूप से यूवीबी रेज, में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा कोशिकाओं के अत्यधिक उत्पादन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बिना डॉक्टरी सलाह के धूप में अधिक समय बिताना हानिकारक भी हो सकता है। लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहने से सोरायसिस के लक्षण बढ़ सकते हैं या त्वचा को अतिरिक्त नुकसान पहुंच सकता है।
सुरक्षित धूप संपर्क: कितनी देर और कब?
त्वचा विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार:
सोरायसिस के मरीज सुबह 8 से 10 बजे के बीच, सप्ताह में 2-3 बार धूप ले सकते हैं।
शुरुआत 5 से 10 मिनट से करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच की तेज धूप से बचें, क्योंकि इस समय यूवी रेज सबसे अधिक प्रभावशाली होती हैं।
किसी भी नई दिनचर्या को अपनाने से पहले अपने डर्मेटोलॉजिस्ट या नेचुरोपैथी विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
धूप के संभावित फायदे (सीमित मात्रा में)
त्वचा कोशिका वृद्धि में कमी: यूवीबी रेज त्वचा कोशिकाओं के असामान्य रूप से तेज विभाजन को धीमा कर सकती है, जिससे पपड़ीदार परतें कम बनती हैं।
सूजन में राहत: धूप के संपर्क से त्वचा की सूजन, लालिमा और खुजली में कमी आ सकती है।
विटामिन डी संश्लेषण: धूप शरीर में विटामिन डी के निर्माण में सहायक होती है, जो इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने और सोरायसिस के लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।
टी-सेल्स नियंत्रण: यूवी रेज अति सक्रिय टी-सेल्स को शांत करने में मदद कर सकती है, जो सोरायसिस में ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया को कम कर सकती है।
अत्यधिक धूप के जोखिम
सनबर्न और कोएबनेर घटना: अधिक धूप से सनबर्न हो सकता है, जिससे त्वचा पर नए सोरायसिस पैच उभर सकते हैं। इसे चिकित्सा भाषा में ‘कोएबनेर घटना’ कहा जाता है।
त्वचा कैंसर का बढ़ता जोखिम: लंबे समय तक यूवी एक्सपोजर त्वचा कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और स्किन कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है, विशेषकर उन मरीजों में जो फोटोथेरेपी ले रहे हों।
त्वचा की उम्र बढ़ने के लक्षण: अत्यधिक धूप कोलेजन को नष्ट कर सकती है, जिससे झुर्रियां, फाइन लाइंस और डार्क स्पॉट्स जैसे लक्षण जल्दी दिखाई दे सकते हैं।
फोटोसेंसिटिविटी: सोरायसिस की कुछ दवाएं त्वचा को धूप के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती हैं, जिससे जलन, लालिमा या छाले हो सकते हैं।
त्वचा का शुष्क होना: लंबे समय तक धूप में रहने से त्वचा अपनी प्राकृतिक नमी खो सकती है, जिससे खुजली और जलन बढ़ सकती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि धूप के संपर्क के बाद त्वचा पर छाले, तीव्र जलन, अत्यधिक खुजली, त्वचा की परतें उखड़ना, दर्द में वृद्धि या नए पैचेज दिखाई दें, तो तुरंत त्वचा विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श करें।
निष्कर्ष
सोरायसिस एक जटिल ऑटोइम्यून स्थिति है, जिसका प्रबंधन सावधानी और विशेषज्ञ मार्गदर्शन से ही संभव है। सीमित और सही समय पर धूप लेना कुछ मरीजों के लिए लाभदायक हो सकता है, लेकिन यह निर्णय व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति, दवाओं और त्वचा की प्रतिक्रिया के आधार पर ही लिया जाना चाहिए। विशेषज्ञों से नियमित परामर्श और व्यक्तिगत देखभाल योजना ही सोरायसिस को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की कुंजी है।
स्वास्थ्य ही संपदा है।
मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी विशेषज्ञ, आगरा