---Advertisement---

पालघर के सफाले का गौरव: विधीश राऊत ने 79 देशों के खिलाड़ियों को पछाड़कर रचा इतिहास, जीता अंतरराष्ट्रीय योग स्वर्ण पदक |

---Advertisement---

परिचय: अदम्य साहस और विश्व स्तरीय उपलब्धि

अपनी अटूट लगन और कठिन परिश्रम के दम पर पालघर जिले के सफाले गाँव के रहने वाले युवा योग साधक कु. विधीश जयेश राऊत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है। विश्व भर के 79 देशों के प्रतिभागियों से भरी इस प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल करके इस होनहार खिलाड़ी ने न केवल पालघर, बल्कि संपूर्ण महाराष्ट्र के गौरव में चार चाँद लगा दिए हैं।

संघर्ष और समर्पण: साधनों की कमी ने नहीं रोका सपनों को

डॉ. पांडुरंग वामन अमृते शिक्षण संस्था के अंतर्गत संचालित ‘कै. चंद्रप्रभा चित्तरंजन श्रॉफ इंग्लिश मीडियम स्कूल’ के विद्यार्थी विधीश को बचपन से ही योग कला में गहरी रुचि रही। हालाँकि, स्थानीय स्तर पर उचित प्रशिक्षण सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें अपने लक्ष्य के लिए भारी संघर्ष करना पड़ा। वे नियमित रूप से चार रेलवे स्टेशन का सफर तय करके अभ्यास करने जाते थे। कई बार तो उन्हें रात वहीं बितानी पड़ती थी और सुबह की पहली ट्रेन पकड़कर सीधे स्कूल पहुँचना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया था। इतनी चुनौतियों के बावजूद, विधीश ने अपनी शिक्षा और योग साधना के बीच एक उत्कृष्ट संतुलन कायम रखा।

सफलता का सफर: राज्य से लेकर विश्व मंच तक

विधीश की मेहनत रंग लाई और उनके प्रदर्शन ने एक के बाद एक नए कीर्तिमान स्थापित किए:
राज्य स्तरीय उपलब्धि: लातूर में आयोजित ‘राज्यस्तरीय शालेय योगासन क्रीड़ा स्पर्धा 2024-25’ में 14 वर्ष से कम आयु वर्ग के पारंपरिक और कलात्मक योगासन प्रतियोगिताओं में दोहरे स्वर्ण पदक जीतकर उन्हें ‘बेस्ट ऑफ द बेस्ट प्लेयर’ का खिताब मिला।
राष्ट्रीय स्तर पर दबदबा: संगमनेर में हुए ‘राष्ट्रीय योगासन चैंपियनशिप 2025’ में लेग बैलेंस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने विश्व स्तरीय प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई किया। इसके अलावा, त्रिपुरा के अगरतला में आयोजित राष्ट्रीय शालेय प्रतियोगिता में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हुए पारंपरिक योग वर्ग में रजत पदक भी अपने नाम किया। ‘योगासन भारत’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्पर्धा में भी उन्होंने लेग बैलेंस वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया।
अंतरराष्ट्रीय विजय: ‘योगासन भारत’ द्वारा आयोजित वैश्विक प्रतियोगिता में 79 देशों के शीर्ष खिलाड़ियों को मात देकर विधीश ने स्वर्ण पदक जीता। इसके उपरांत, प्रथम विश्व योगसाधना प्रतियोगिता में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल कर अपनी सफलता की गाथा को और भी चमकदार बना दिया।

परिवार और गुरुजनों का अहम योगदान

विधीश की इस ऐतिहासिक जीत में उनके माता-पिता, जयेश राऊत और कृपाली राऊत, की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने पुत्र के सपनों को कभी सीमित नहीं होने दिया। विधीश का परिपक्व स्वभाव इस बात का प्रमाण है कि वे प्रतियोगिताओं के खर्च के लिए अपनी स्वयं की पुरस्कार राशि का उपयोग करने की सलाह देते हैं। उनके इस सफर में उनके प्रशिक्षक, विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकगण और पालघर जिला योगासन एसोसिएशन का मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन भी एक मजबूत आधार रहा है।

युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत

आज विधीश राऊत की जीवन गाथा हजारों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा का विषय बन चुकी है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि लक्ष्य के प्रति समर्पण, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास हो, तो साधनों की कमी भी विश्व स्तर पर सफलता प्राप्त करने के मार्ग में बाधा नहीं बन सकती। विधीश की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पालघर जिले के खेल एवं योग जगत के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।

Join WhatsApp

Join Now

---Advertisement---
Rajesh