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विरार बाढ़ का खौफनाक मंजर: 12 दिनों बाद नाले से खींचकर निकाली गई कार, मलबे में तब्दील हुई गाड़ी बयां कर रही कुदरत का कहर |

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विरार:

महाराष्ट्र के वसई तालुका के विरार इलाके से मानसून की तबाही की एक ऐसी खौफनाक तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर हर कोई दंग है। बीती 1 जुलाई को इलाके में हुई रिकॉर्डतोड़ मूसलाधार बारिश के चलते वाघराळपाड़ा क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। इस दौरान पानी के भयानक बहाव में बही एक मारुति इको कार को पूरे 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद नाले से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। कार की मौजूदा स्थिति मानसून की उस भयानक रात की गवाही दे रही है।

लोहे का कबाड़ बन गई कार, तस्वीरें वायरल

नाले की गहराई से जब इस वाहन को बाहर निकाला गया, तो उसकी हालत बेहद दयनीय थी। पानी के भारी दबाव और पत्थरों से टकराने के कारण कार की छत, खिड़कियां, दरवाजे और इंजन पूरी तरह से चकनाचूर हो चुके थे। गाड़ी की इस दुर्दशा की ‘बिफोर और आफ्टर’ (पहले और बाद की) तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर शेयर की जा रही हैं, जो यह बताने के लिए काफी हैं कि उस दिन विरार में प्रकृति का रूप कितना विकराल था।

अन्य लापता वाहनों के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, 1 जुलाई की भीषण बाढ़ के दौरान इस नाले में कई और गाड़ियां भी बह गई थीं। प्रशासन, जेसीबी, हाइड्रा क्रेन और रेस्क्यू टीमों की मदद से नाले के भीतर सर्च ऑपरेशन चला रहा है। 12 दिनों बाद यह पहली कार बरामद हुई है, जबकि बाकी लापता वाहनों की खोज अभी भी गंभीरता से की जा रही है।

स्थानीय जनता ने उठाई स्थायी समाधान की मांग

इस घटना के बाद वाघराळपाड़ा और विरार के नागरिकों ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है। निवासियों ने मांग की है कि ड्रेनेज सिस्टम को सुधारा जाए, बड़े नालों की समय पर और उचित सफाई हो, और जलभराव को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं, जिससे भविष्य में जन-धन की ऐसी बड़ी हानि को समय रहते रोका जा सके।

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Rajesh