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“सिद्धांतों से समझौता कर मिली सफलता बेमानी” – अभिनेता मुकेश खन्ना ने साझा किए संघर्ष और जीवन के मूल मंत्र |

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संवाददाता: साहिल यादव

मुंबई:

भारतीय मनोरंजन जगत के दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना ने एक विशेष बातचीत के दौरान अपने फिल्मी सफर, शुरुआती संघर्ष, पारिवारिक मूल्यों और जीवन के आदर्शों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने आज की युवा पीढ़ी और कलाकारों को प्रेरित करते हुए कहा कि वास्तविक सफलता वही है, जो इंसान को अपने आत्मसम्मान और सिद्धांतों से समझौता किए बिना हासिल हो।

संघर्ष के दिनों में भी नहीं खोया स्वाभिमान, ‘महाभारत’ ने बदली तकदीर

मुकेश खन्ना ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि करियर के आगाज़ में उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक कमाल नहीं दिखा पाईं। इस असफलता के कारण उन्हें लंबे समय तक काम के लिए इंतजार करना पड़ा। हालांकि, ऐसे कठिन दौर में भी उन्होंने कभी किसी के सामने काम के लिए गुहार नहीं लगाई और न ही अपने आदर्शों को पीछे छोड़ा। उन्होंने कहा कि उनके इसी धैर्य और सिद्धांतों का फल था कि आगे चलकर पौराणिक धारावाहिक ‘महाभारत’ में ‘भीष्म पितामह’ के कालजयी किरदार ने उनके करियर को एक नई और अमिट पहचान दी।

कास्टिंग काउच पर बेबाक राय: अवसर फिर मिल सकते हैं, चरित्र नहीं

ग्लैमर इंडस्ट्री में पैर पसारने वाले कास्टिंग काउच जैसे गंभीर मुद्दों पर भी मुकेश खन्ना ने बेहद स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने नए कलाकारों को आगाह करते हुए कहा कि किसी भी भूमिका या बड़े अवसर को पाने के लिए कभी भी गलत रास्ता अख्तियार नहीं करना चाहिए। यदि कोई काम के बदले अनुचित या अनैतिक मांग करता है, तो उसे तुरंत ठुकरा देना ही समझदारी है। उनके अनुसार, जीवन में मौके तो दोबारा मिल सकते हैं, लेकिन एक बार चरित्र और मान-सम्मान खो जाने पर उसे वापस पाना असंभव होता है।

कठिन समय में परिवार ही सबसे बड़ा संबल

मानसिक स्वास्थ्य और अवसाद (डिप्रेशन) जैसे विषयों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी करियर या व्यक्तिगत जीवन में बुरा वक्त आए, तो इंसान को अकेले रहने के बजाय अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहिए। माता-पिता और करीबियों का साथ व्यक्ति को मानसिक रूप से टूटने नहीं देता और उसे अंदर से मजबूत बनाता है। उन्होंने युवाओं को नसीहत दी कि हर परिस्थिति में सही दिशा दिखाने वाले उनके पारिवारिक संस्कार ही हैं, जिसके कारण उन्होंने अपने पूरे जीवन में शराब और धूम्रपान जैसी बुरी आदतों से हमेशा दूरी बनाए रखी।

संस्कार और गरिमा ही हैं असली पहचान

महिलाओं के सम्मान और सामाजिक मूल्यों पर बात करते हुए वरिष्ठ अभिनेता ने ज़ोर दिया कि किसी भी व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसके बाहरी रूप-रंग या दिखावे से नहीं, बल्कि उसके विचारों, आत्मविश्वास और संस्कारों से तय होती है। उन्होंने महिलाओं की गरिमा और समृद्ध भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही, सुखी वैवाहिक जीवन का मूल मंत्र देते हुए उन्होंने कहा कि पति-पत्नी का रिश्ता आपसी विश्वास, सम्मान और समान समर्पण पर टिका होना चाहिए। केवल एक पक्ष से निष्ठा की उम्मीद करना गलत है; दोनों को एक-दूसरे के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए।

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Rajesh