रिपोर्टर: तृप्ति प्रमाण (वसई)
कंपनी पर कब्ज़े और कर्ज़ से बचने के लिए रची गई थी खूनी साजिश
वसई। पालघर जिले की वालीव पुलिस ने 24 जुलाई को ‘जी.एस.एम. फॉइल्स लिमिटेड’ के साझेदार मोहनसिंह लक्ष्मणसिंह परमार पर हुए जानलेवा हमले का सनसनीखेज पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए मास्टरमाइंड पार्टनर सहित कुल 7 आरोपियों को धर दबोचा है। जांच में सामने आया कि यह पूरी साजिश करोड़ों रुपये के आर्थिक विवाद और कंपनी पर पूरी तरह से कब्जा जमाने की नीयत से रची गई थी।
अमेरिकी शेयर बाजार में घाटा और 32 करोड़ की धोखाधड़ी
पुलिस जांच के मुताबिक, पीड़ित के व्यावसायिक साझेदार सागर गिरीश भानुशाली को अमेरिकी शेयर बाजार में भारी वित्तीय नुकसान हुआ था, जिससे वह कर्ज में डूब गया। इस संकट से उबरने के लिए उसने अपने पार्टनर मोहनसिंह परमार को कंपनी के शेयर बेचे, जिसके बदले में परमार ने उसे लगभग 32 करोड़ रुपये का भुगतान किया। हालांकि, रकम वापस न करनी पड़े और कंपनी का मालिकाना हक खुद के पास आ जाए, इसलिए आरोपी ने परमार को रास्ते से हटाने का खूनी प्लान तैयार किया।
पॉइंट ब्लैंक रेंज पर मारी गोली, पिस्टल की बट से किया हमला
24 जुलाई की शाम शूटर सुजीत देवेंद्रभाई पांडे अपने साथी अनुप वीरेंद्र प्रजापति के साथ बाइक से कंपनी परिसर पहुंचा। जैसे ही परमार बाहर निकले, सुजीत ने बेहद करीब से उन पर गोली चला दी। दूसरी गोली मिसफायर होने पर हमलावर ने पिस्तौल की बट से परमार के सिर पर वार किया और फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल व्यवसायी की अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
यूपी से दबोचे गए शूटर, 7 आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे
वालीव पुलिस ने सीसीटीवी (CCTV), सीडीआर (CDR), तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों की सूचना पर उत्तर प्रदेश में छापेमारी कर मुख्य साजिशकर्ता सागर भानुशाली, मुख्य शूटर सुजीत पांडे, विजयकुमार विश्वकर्मा, मनोज ठठेरा, गोकुल गौतम और अनूप प्रजापति सहित सभी 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इस वारदात के पीछे किसी संगठित आपराधिक गिरोह (Organized Crime Gang) का भी हाथ है।