जौनपुर (सरायख्वाजा)। स्थानीय थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत धौरहल के प्रधान संजय कुमार द्वारा गांव के ही निवासी विंध्यवासिनी मिश्रा और उनके परिजनों के खिलाफ दर्ज कराया गया फर्जी एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट का मुकदमा सुप्रीम कोर्ट से भी पूरी तरह निरस्त हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई के दौरान मामले को पूरी तरह बेबुनियाद और पूर्वाग्रह से ग्रसित मानते हुए केस को खारिज कर दिया।
विशेष न्यायालय के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी मिला न्याय
मामला विशेष न्यायालय से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। 5 अगस्त 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश जे. बी. पारडीवाला और जस्टिस दिनेश चंद्र की पीठ ने पाया कि विंध्यवासिनी मिश्रा और उनके परिवार पर लगाए गए सभी आरोप निराधार थे। शीर्ष अदालत ने निचले कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए मुकदमा निरस्त करने का आदेश सुनाया।
“सत्य और न्याय की अंतिम जीत”
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद पीड़ित परिवार और उनके शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विंध्यवासिनी मिश्रा ने राहत व्यक्त करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से उन्हें और उनके परिवार को आखिरकार न्याय मिला है। उन्होंने इस फैसले को “सत्य और न्याय की अंतिम जीत” करार दिया।
(संवाददाता: शंभू, जौनपुर)