विशेष प्रतिनिधि: विरार
विरार: वसई-विरार शहर में अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर होटलों, डेयरियों और पानटपरियों पर लगातार छापेमारी और कार्रवाई की जा रही है। लेकिन इस कार्रवाई के बीच सड़क किनारे लगने वाले स्ट्रीट फूड स्टॉल्स और खाऊ गलियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि खुले में बन रहे अस्वच्छ भोजन पर प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।
विरार पश्चिम जकात नाका खाऊ गली का रियलिटी चेक
विरार (पश्चिम) स्थित जकात नाका परिसर की प्रसिद्ध खाऊ गली में किए गए एक विशेष रियलिटी चेक के दौरान चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आईं। इस क्षेत्र में लगभग 20 से 25 चायनीज खाद्य पदार्थों की गाड़ियां संचालित पाई गईं।
यहाँ खाद्य पदार्थ तैयार करते समय स्वच्छता के बेसिक नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
- क्या इस्तेमाल किया जाने वाला पानी और तेल शुद्ध है?
- क्या इस्तेमाल हो रहे कच्चे माल (सब्जियां, सॉस, मसाले) की गुणवत्ता सही है?
- क्या भोजन पकाने और परोसने वाली जगह मक्खियों व धूल-मिट्टी से सुरक्षित है?
इन सभी महत्वपूर्ण मानकों पर स्थिति काफी चिंताजनक दिखाई दी।
बारिश के मौसम में स्वास्थ्य संकट का खतरा
विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि मॉनसून के दौरान खुले वातावरण में तैयार भोजन से संक्रमण, डायरिया और खाद्य विषाक्तता (Food Poisoning) जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है। इसके बावजूद इन गाड़ियों की कोई नियमित सैंपलिंग या जांच नहीं की जा रही है।
नागरिकों ने की त्वरित कार्रवाई की मांग
शहरवासियों का कहना है कि प्रशासन का दोहरा रवैया समझ से परे है। यदि पंजीकृत दुकानों, डेयरियों और होटलों पर नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है, तो स्ट्रीट फूड वेंडर्स और खाऊ गलियों के लिए ये ढील क्यों? नागरिकों ने मांग की है कि FDA और मनपा का स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से जकात नाका खाऊ गली सहित शहर की अन्य खाद्य गलियों में तुरंत जांच अभियान चलाए और अस्वच्छता फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे।