जौनपुर (तृप्ति प्रमाण) | संवाददाता शम्भू विश्वकर्मा:
उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सेवाएं दे रहे एमबीबीएस (MBBS) इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ में शनिवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। पिछले 3 वर्षों से केवल आश्वासन मिलने से नाराज डॉक्टरों ने अब आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
3 साल से मिल रहा सिर्फ आश्वासन, 6 डॉक्टर भूख हड़ताल पर
उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉलेज के डॉ. देवेश गंगवार ने जानकारी देते हुए बताया कि इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड को वर्तमान 12,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह करने के लिए प्रशासन और शासन को कई बार ज्ञापन सौंपा जा चुका है। लेकिन 3 साल से केवल आश्वासन मिलने के कारण छात्रों का विश्वास टूट गया। धरने के दौरान 6 इंटर्न डॉक्टर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि 3 दिनों के भीतर आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ, तो वे मुख्यमंत्री आवास के समक्ष सामूहिक भूख हड़ताल करेंगे।
24 घंटे ड्यूटी और भारी काम के बोझ के बीच कम स्टाइपेंड
इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि 4.5 साल की कठिन पढ़ाई पूरी करने के बाद 1 साल की इंटर्नशिप चिकित्सा प्रशिक्षण का सबसे अहम हिस्सा होती है। इस दौरान इंटर्न्स अस्पतालों में:
- इमरजेंसी सेवाएं और नाइट ड्यूटी संभालते हैं,
- वार्ड ड्यूटी और मरीजों की लगातार निगरानी करते हैं,
- जटिल चिकित्सकीय प्रक्रियाओं में वरिष्ठ डॉक्टरों का सहयोग करते हैं।
उनकी कार्य अवधि अक्सर तय समय से काफी ज्यादा होती है। ऐसे में 12 हजार रुपये का स्टाइपेंड उनके काम और देश के अन्य राज्यों (जहाँ यूपी से अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है) की तुलना में बहुत कम है।
आर्थिक चिंता से मुक्ति और बेहतर मरीज सेवा की उम्मीद
आंदोलनरत डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा के लिए नहीं, बल्कि उनके कार्य और योगदान के अनुरूप उचित आर्थिक सहयोग के लिए है। 30 हजार रुपये स्टाइपेंड मिलने से वे आर्थिक तनाव से मुक्त होकर मरीजों की बेहतर सेवा और आगे की उच्च शिक्षा पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
(हमारे तृप्ति प्रमाण व्हाट्सएप चैनल को फॉलो करना ना भूलें, आगे की खबरों से अपडेट होने के लिए धन्यवाद। – शम्भू विश्वकर्मा, संवाददाता, जौनपुर)