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गोखिवरे बायोमाइनिंग घोटाले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई: EOW करेगी करोड़ों की कथित धोखाधड़ी की जांच, ACP स्तर के अधिकारी की होगी नियुक्ति |

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रिपोर्टर: तृप्ति प्रमाण (विरार)

वसई-विरार शहर महानगरपालिका (VVMC) के गोखिवरे स्थित डंपिंग ग्राउंड में लगभग 15 लाख मीट्रिक टन कचरे के बायोमाइनिंग प्रसंस्करण के नाम पर हुए कथित करोड़ों रुपये के बहुचर्चित घोटाले में पुलिस प्रशासन ने बेहद सख्त और सकारात्मक रुख अपनाया है। मीरा-भाईंदर, वसई-विरार (MBVV) पुलिस आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि इस पूरे मामले की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। इसके लिए सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी और प्राथमिक जांच के पश्चात पूरा मामला पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त से की मुलाकात घोटाले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर 2 सितंबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजन नाईक के नेतृत्व में पुलिस आयुक्त से मुलाकात की और एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में वीवीएमसी के पूर्व नेता प्रतिपक्ष मनोज गोपाल पाटील, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रज्ञा पाटील, गुटनेता अशोक शेळके और नगरसेवक प्रकाश वाझे समेत कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

फर्जी बिलों के जरिए 37.66 करोड़ रुपये के गबन का आरोप सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, गोखिवरे डंपिंग ग्राउंड में कचरा निस्तारण और बायोमाइनिंग के लिए ‘मेसर्स साई यूटिलिटी कॉन्ट्रैक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड’ को ठेका दिया गया था। आरोप है कि संबंधित ठेकेदार ने जमीनी स्तर पर कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण किए बिना ही मनपा प्रशासन को अंधेरे में रखा और कथित तौर पर 37 करोड़ 66 लाख 73 हजार 510 रुपये के फर्जी बिल मंजूर करवा लिए। इस संदर्भ में विरार के बोळींज पुलिस स्टेशन में 27 अगस्त 2026 को बीएनएस (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला (FIR No. 0474/2026) पहले ही दर्ज किया जा चुका है।

2016 के 24.62 करोड़ के खर्च और सैटेलाइट तस्वीरों पर उठाए गंभीर सवाल भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने साल 2016 में निष्क्रिय अवशेष प्लांट में लगी आग के बाद वैज्ञानिक लैंडफिल के नाम पर खर्च किए गए 24.62 करोड़ रुपये की जांच कराने की भी मांग दोहराई है। भाजपा का दावा है कि कैग (CAG) की रिपोर्ट में भी इस भारी-भरकम खर्च को व्यर्थ करार दिया गया था। इतना ही नहीं, वर्ष 2025 की सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जिस 6.5 एकड़ जमीन को 2016 में पूरी तरह खाली घोषित किया गया था, वहां बाद में कचरे के विशालकाय पहाड़ खड़े दिखाई दिए।

ठेकेदारों, सलाहकारों और मनपा अधिकारियों की संपत्ति जांच की मांग विपक्ष के नेता मनोज गोपाल पाटील ने इसे आम नागरिकों के टैक्स के पैसों की खुली लूट बताते हुए कहा कि ठेकेदार के साथ-साथ इसमें शामिल सलाहकार कंपनियों और महानगरपालिका के संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों की भूमिका की भी सघन जांच होनी चाहिए। दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई कर जनता के पैसे की पाई-पाई वसूल की जानी चाहिए।

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Rajesh