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नालासोपारा में गूंजी आम जनता की आवाज: फेरीवालों और आदिवासियों के मुद्दों पर 5 घंटे चला मनपा का घेराव, लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित |

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2 हजार से अधिक लोगों ने निकाला विशाल मोर्चा

फेरीवालों, आदिवासी किसानों, खेत मजदूरों और कामगारों की ज्वलंत समस्याओं को लेकर गुरुवार को नालासोपारा में जनसैलाब उमड़ पड़ा। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और ‘फेरीवाला बचाव संघर्ष समिति’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशाल मोर्चे में आयोजकों के अनुसार लगभग 2,000 से अधिक लोग शामिल हुए। नालासोपारा रेलवे स्टेशन से शुरू हुआ यह मोर्चा वसई-विरार शहर महानगरपालिका के सहायक आयुक्त कार्यालय पहुँचा, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय का घेराव कर दिया। सुरक्षा के दृष्टिकोण से मौके पर कड़ा पुलिस बंदोबस्त तैनात किया गया था।

लगभग 5 घंटे चला घेराव, प्रशासन को झुकना पड़ा

प्रदर्शनकारियों ने महानगरपालिका प्रशासन पर फेरीवालों के खिलाफ मनमानी कार्रवाई, कथित अवैध वसूली और बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किए दुकानों/गाड़ियों को हटाने का गंभीर आरोप लगाया। लगभग पाँच घंटे तक चले इस घेराव के बाद, मनपा प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की माँगों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए लिखित आश्वासन दिया। प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के उपरांत ही आंदोलन को स्थगित करने की घोषणा की गई।

फेरीवालों की मुख्य माँगें:

  • अवैध टपरियों पर कार्रवाई की आड़ में आम फेरीवालों की आजीविका को प्रभावित न किया जाए।
  • दीनदयाल योजना में हुई कथित फर्जी गाड़ियों के आवंटन और धोखाधड़ी की निष्पक्ष जांच हो।
  • अनधिकृत बिजली कनेक्शनों को तुरंत हटाया जाए।
  • फेरीवालों के खिलाफ की जाने वाली हिंसात्मक व मनमानी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।
  • बायोमेट्रिक सत्यापन (Biometric Verification) पूरा होने के बाद ही नियमानुसार शुल्क वसूली की जाए।

आदिवासी पाड़ों की मूलभूत समस्याओं और वनाधिकार पर जोर

मोर्चे के दौरान स्थानीय आदिवासी बस्तियों (पाड़ों) की वर्षों पुरानी उपेक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने आदिवासी क्षेत्रों में पक्की सड़कें, नियमित पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, घर नंबर तथा घरपट्टी जैसी बुनियादी सुविधाएँ तुरंत मुहैया कराने की माँग की। इसके अलावा, वर्ष 2011 से पूर्व निर्मित आवासीय अतिक्रमणों का नियमितीकरण करने और वनाधिकार कानून के अंतर्गत पेंडिंग पड़े व्यक्तिगत (IFR) व सामुदायिक वनाधिकार (CFR) दावों के अविलंब निस्तारण की माँग रखी।

नेतृत्व और कड़ी चेतावनी

इस आंदोलन का कुशल नेतृत्व कॉ. शेरू वाघ, रुपाली पवार, आकाश गुप्ता, राजन मात्रे, कॉ. चेतन मच्छा, कॉ. छाया खरपडे, कॉ. अंकुश खरपडे, कॉ. पार्वती पाडेकर, कॉ. अनिरुद्ध मेहेर, कॉ. रोहित चौरसिया और कॉ. चंद्रकांत पवार सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने किया।

आंदोलन को संबोधित करते हुए कॉ. शेरू वाघ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि महानगरपालिका प्रशासन ने दिए गए लिखित आश्वासन पर समयबद्ध अमल नहीं किया, तो भाकपा और संघर्ष समिति आने वाले दिनों में और अधिक उग्र ‘मुकाम आंदोलन’ (अनिश्चितकालीन धरना) शुरू करेगी।

Reporter: राजेश कोरी, ब्यूरो चीफ (तृप्ति प्रमाण)

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Rajesh