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वसई: 77 वर्षीय बुजुर्ग आदिवासी मजदूर का ‘अधिकार’ के लिए संघर्ष, तहसील दफ्तर में धरने के बाद जागा प्रशासन, 2 साल बाद चालू हुआ आधार कार्ड |

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महाराष्ट्र/वसई: प्रशासनिक लालफीताशाही और लापरवाही का एक हैरान कर देने वाला मामला वसई से सामने आया है। अपने जायज अधिकार और आधार कार्ड को दोबारा चालू (सक्रिय) कराने के लिए 77 वर्षीय बुजुर्ग आदिवासी मजदूर जयराम वळवी को तहसील कार्यालय के बाहर धरना देने पर मजबूर होना पड़ा। लगातार दो साल तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो बुजुर्ग ने हाथ में राजदंड लेकर आंदोलन का रास्ता चुना। इसके बाद हरकत में आए प्रशासन ने महज 24 घंटे के भीतर उनके आधार कार्ड को दोबारा सक्रिय कर दिया।

2 साल से भटक रहे थे जयराम वळवी वसई तालुका के मेढे गांव के रहने वाले 77 वर्षीय जयराम वळवी का आधार कार्ड पिछले दो वर्षों से अमान्य (Inactive) बता रहा था। आधार कार्ड बंद होने की वजह से उन्हें कई सरकारी योजनाओं और नागरिक सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा था। इस समस्या के समाधान के लिए बुजुर्ग ने वसई तहसील कार्यालय से लेकर पालघर जिला कलेक्ट्रेट दफ्तर तक कई बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन और निराशा ही हाथ लगी।

हाथ में राजदंड लेकर बेटों के साथ बैठे धरने पर तमाम कोशिशें नाकाम होने पर सोमवार को जयराम वळवी अपने दो बेटों के साथ वसई तहसील दफ्तर पहुंचे। अपने पारंपरिक राजदंड को हाथ में लेकर उन्होंने कड़ा रुख अपनाया और ऐलान किया कि जब तक उनका आधार चालू नहीं होगा, वे दफ्तर से नहीं उठेंगे। बुजुर्ग के इस आंदोलन से तहसील परिसर में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत हरकत में आ गए।

तहसीलदार की पहल से 24 घंटे में हुआ समाधान मामले की गंभीरता को देखते हुए वसई के तहसीलदार ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया। उन्होंने तुरंत राज्यस्तरीय आधार प्रबंधन टीम (UIDAI State Level System) से संपर्क किया और लगातार फॉलोअप लिया। प्रशासन के इस त्वरित समन्वय का परिणाम यह हुआ कि मंगलवार सुबह करीब 10 बजे जयराम वळवी का आधार कार्ड आधिकारिक तौर पर सक्रिय कर दिया गया।

व्यवस्था पर श्रमजीवी संगठन ने उठाए गंभीर सवाल इस पूरी घटना पर श्रमजीवी संगठन ने गहरा दुख और चिंता व्यक्त की है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि जयराम वळवी पूर्व में बंधुआ मजदूरी (वेठबिगारी) से मुक्त हुए व्यक्ति हैं। 77 साल की उम्र में भी यदि एक नागरिक को अपने मूलभूत पहचान पत्र के लिए दो साल तक दर-दर भटकना पड़े और धरने पर बैठना पड़े, तो यह हमारी प्रशासनिक व्यवस्था की लाचारी को दर्शाता है। संगठन ने कहा कि यह घटना साबित करती है कि आज भी आम जनता को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष और आवाज बुलंद करनी पड़ती है।

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Rajesh