तृप्ति प्रमाण न्यूज़ / पटना
रिपोर्टर / ब्यूरो चीफ: विनोद प्रसाद
पटना: पूर्व मध्य रेलवे सीनियर सेकेंडरी स्कूल (खगौल) स्थित सृजन प्रेक्षागृह में प्रसिद्ध नाट्य संस्था ‘सूत्रधार’ की ओर से भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की अमर लोकनाट्य रचना ‘गबरघिचोर’ का अत्यंत प्रभावशाली एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। नाटक की परिकल्पना और सशक्त निर्देशन नवाब आलम ने किया। लोक संगीत और जीवंत संवादों से सजे इस नाटक ने ग्रामीण भारत के कड़वे यथार्थ, पलायन की पीड़ा और स्त्री के संघर्ष को प्रमुखता से रेखांकित किया।
रोजगार का पलायन, उपेक्षा और मां की ममता की मर्मस्पर्शी कहानी
नाटक में दिखाया गया कि कैसे आजीविका की तलाश में गांव के पुरुष शहरों की ओर पलायन कर जाते हैं और पीछे छूट जाती हैं उनकी उपेक्षित पत्नियां, जो खेत-खलिहानों में हाड़-तोड़ मेहनत कर जीवन यापन करती हैं। इसी एकाकीपन और विवशता के बीच महिला (गलीज बहू) का संबंध गांव के एक मनचले युवक से बन जाता है, जिससे ‘गबरघिचोर’ का जन्म होता है। समाज उस निर्दोष बच्चे को ‘अवैध’ करार देता है।
जब बच्चे के अधिकार और पितृत्व का विवाद गांव की पंचायत में पहुंचता है, तो वहां न्याय के स्थान पर स्वार्थ, घूसखोरी और संवेदनहीनता देखने को मिलती है। जब मामला नहीं सुलझता, तो पंच बच्चे के तीन टुकड़े कर तीनों पक्षों में बराबर बांटने का अमानवीय फरमान सुना देते हैं। इस क्रूर फैसले पर मां अपनी ममता और करुणा का परिचय देते हुए बच्चे की जान बचाने के लिए अपने हक का त्याग कर देती है और उसे किसी एक को सौंपने की गुहार लगाती है। मां की यह निस्वार्थ ममता देखकर पंचों की आंखें खुल जाती हैं और अंततः फैसला मां (गलीज बहू) के पक्ष में सुनाया जाता है।
कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा
नाटक में मिथिलेश कुमार पांडेय ने ‘पंच’ और सिंपी सिंह ने ‘गलीज बहू’ की केंद्रीय भूमिका में अपने बेजोड़ अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं ‘गलीज’ के रूप में मुकेश कुमार, ‘गड़बड़ी’ के किरदार में अमन कुमार, ‘गबरघिचोर’ बने कुंदन कुमार तथा ‘जल्लाद’ की भूमिका में प्रेम प्रकाश सैनिक ने अपने जीवंत अभिनय से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।
जयप्रकाश मिश्र की बेहतरीन रूप-सज्जा और अखिलेश सिंह, लवकुश कुमार, अभिजीत कुमार, शशि भूषण शर्मा, सऊद आलम, भोला सिंह, आसिफ हसन, राजीव रंजन त्रिपाठी, हुस्ना फातिमा व संजय गुप्ता के संगीतमय सहयोग ने नाटक में प्राण फूंक दिए।
दिग्गज हस्तियों की रही गरिमामयी मौजूदगी
इस सांस्कृतिक संध्या में दानापुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी (SR DPO) अतुल कुमार, बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ, प्रो. (डॉ.) मधु प्रभा सिंह, मनीष कुमार तथा समाजसेवी दीनानाथ प्रसाद यादव सहित कला और साहित्य जगत की कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं।