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“स्वस्थ आंत, स्वस्थ जीवन: डॉ. मीना अग्रवाल, नेचुरोपैथी विशेषज्ञ ने बताया आंतों की क्रियाशीलता का रहस्य”|

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17 दिसंबर 2025**
आंतें केवल भोजन पचाने वाला अंग नहीं हैं, बल्कि पूरे शरीर की स्वास्थ्य प्रणाली का केंद्र मानी जाती हैं। नेचुरोपैथी विशेषज्ञ डॉ. मीना अग्रवाल ने बताया कि आंतों की स्वस्थ क्रिया न केवल शारीरिक ऊर्जा बनाए रखती है, बल्कि मानसिक संतुलन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डॉ. अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि आंतें दो मुख्य भागों—छोटी आंत और बड़ी आंत—में विभाजित होती हैं। छोटी आंत भोजन को रासायनिक रूप से पचाकर पोषक तत्वों को रक्त और लसीका में अवशोषित करती है। इस प्रक्रिया में आमाशय से निकले पाचन रस, यकृत से पित्त और अग्न्याशय से एंजाइम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयुर्वेद इसे “अन्नसंशोधन” और “रससिद्धि” की प्रक्रिया कहता है।

बड़ी आंत का मुख्य कार्य अपशिष्ट पदार्थों को संक्षेपित करना और उन्हें शरीर से बाहर निकालना है। इसके अलावा, यह पानी और कुछ खनिजों का पुनः अवशोषण भी करती है। बड़ी आंत में निवास करने वाले स्वस्थ जीवाणु विटामिन K और कुछ अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्वों का निर्माण करते हैं। आयुर्वेद इस प्रक्रिया को “विषनिष्कासन” और “मलसिद्धि” कहता है।

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि आंतों की क्रिया केवल शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से भी गहराई से जुड़ी है। मानसिक तनाव, चिंता या क्रोध आंतों की गतिविधि को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे अपच, गैस, कब्ज या दस्त जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह सीधे अन्नमय धातु और ओज पर प्रभाव डालता है।

स्वस्थ आंतों के लिए डॉ. अग्रवाल ने निम्नलिखित उपाय सुझाए:

  • ताजगीपूर्ण, संतुलित और प्राकृतिक आहार का सेवन
  • फल, सब्जियां, पूरे अनाज, दही और घी जैसे पाचन-अनुकूल आहार को प्राथमिकता देना
  • दिनभर में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी पीना
  • नियमित रूप से योग या टहलने जैसे हल्के व्यायाम करना
  • मानसिक तनाव को कम करने के लिए ध्यान या श्वास व्यायाम का अभ्यास

उन्होंने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर पंचकर्म चिकित्सा—विशेष रूप से बस्ति—का उपयोग आंतों की गहरी सफाई और वात-कफ दोष के संतुलन के लिए किया जा सकता है।

अंत में डॉ. अग्रवाल ने कहा, “जब आंतें स्वस्थ और संतुलित होती हैं, तो शरीर में बल, ओज और दीर्घायु बनी रहती है। आंतें न केवल पाचन के केंद्र हैं, बल्कि समग्र जीवन शक्ति के आधार भी हैं।”

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Rajesh